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Male Infertility: शादी से पहले अब कपल करा रहे ये टेस्ट, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

Male Infertility Trends 2026: बदलती जीवनशैली और पर्यावरण के बढ़ते खतरों के बीच अब शादियों का ट्रेंड भी बदल रहा है। अब युवा केवल कुंडली नहीं मिला रहे, बल्कि शादी से पहले फर्टिलिटी टेस्ट (Fertility Test) करवा रहे हैं। डॉक्टर्स के अनुसार, ओपीडी में ऐसे कपल्स की संख्या बढ़ी है जो भविष्य में किसी भी अनचाही परेशानी से बचने के लिए ‘प्री-वेडिंग हेल्थ चेकअप’ को प्राथमिकता दे रहे हैं।


शुक्राणुओं की संख्या में 50% से अधिक की गिरावट: एक वैश्विक संकट

मशहूर फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. अंजलि मालपानी के अनुसार, दुनिया भर में पुरुषों के स्पर्म काउंट में चौंकाने वाली गिरावट आई है। 2022 के एक मेटा-एनालिसिस के मुताबिक, साल 1973 से 2018 के बीच पुरुषों के औसत स्पर्म कंसन्ट्रेशन में 51.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वर्तमान में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) 15 मिलियन प्रति मिलीलीटर को नॉर्मल रेंज का निचला स्तर मानता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 90 के दशक में यह मानक कहीं अधिक ऊंचा था, लेकिन आज गिरती क्वालिटी के कारण इसे घटाना पड़ा है।


बांझपन के लिए केवल महिलाएं जिम्मेदार नहीं: क्या कहते हैं आंकड़े?

समाज में आज भी बांझपन का दोष अक्सर महिलाओं पर मढ़ा जाता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के आंकड़े कुछ और ही हकीकत बयां करते हैं। मेदांता हॉस्पिटल के प्रोफेसर एमेरिटस डॉ. नर्मदा प्रसाद गुप्ता के अनुसार, बांझपन के मामलों का विभाजन कुछ इस तरह है:

कारणप्रतिशत भागीदारी
केवल पुरुष कारक40%
केवल महिला कारक40%
दोनों पार्टनर्स (Combined)10%
अज्ञात कारण (Unexplained)10%

पुरुषों में इनफर्टिलिटी के मुख्य कारण (Causes of Male Infertility)

डॉक्टर्स का कहना है कि समस्या केवल स्पर्म काउंट की नहीं है, बल्कि गुणवत्ता की भी है। मुख्य समस्याओं में शामिल हैं:

  1. Azoospermia (एजूस्पर्मिया): जब वीर्य के नमूने में स्पर्म बिल्कुल भी नहीं मिलते।
  2. OATS सिंड्रोम: इसमें स्पर्म की संख्या (Oligo), गतिशीलता (Astheno) और आकार (Terato) तीनों ही सामान्य से कम होते हैं।
  3. DNA Damage: गलत जीवनशैली के कारण स्पर्म के डीएनए को नुकसान पहुँचता है, जिससे गर्भधारण में समस्या आती है।

क्यों गिर रही है फर्टिलिटी? इन 5 कारकों को समझें

डॉ. गुप्ता ने आधुनिक जीवन के उन खतरों के बारे में बताया है जो साइलेंट किलर की तरह काम कर रहे हैं: हम जो पानी और भोजन ले रहे हैं, उनमें मौजूद सूक्ष्म प्लास्टिक कण स्पर्म प्रोटीन को खराब कर रहे हैं। हवा में मौजूद प्रदूषक कण शरीर में फ्री रेडिकल्स बनाते हैं, जो टेस्टिस को नुकसान पहुँचाते हैं। BPA (प्लास्टिक में पाया जाने वाला) और कीटनाशक शरीर के हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ रहे हैं।धूम्रपान, शराब, तनाव और देर तक काम करने की आदतें फर्टिलिटी की सबसे बड़ी दुश्मन हैं। महिलाओं की तरह पुरुषों की भी उम्र बढ़ने के साथ स्पर्म क्वालिटी कम होने लगती है।


क्या है समाधान? (Expert Advice)

एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि डरे नहीं बल्कि जागरूक बनें। यदि आप शादी की योजना बना रहे हैं, तो:

  1. हेल्थ चेकअप: प्री-वेडिंग चेकअप में फर्टिलिटी टेस्ट को शामिल करें।
  2. लाइफस्टाइल सुधारें: स्वस्थ आहार लें, व्यायाम करें और प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग कम करें।
  3. समय पर परामर्श: यदि शादी के एक साल बाद तक गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो बिना संकोच यूरोलॉजिस्ट या फर्टिलिटी एक्सपर्ट से मिलें।

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