रायपुर। छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों के कर्मचारी संघों को लेकर राज्य शासन ने बड़ा निर्देश जारी किया है। अब ऐसे कर्मचारी संघ और संगठन, जिन्हें शासन से विधिवत मान्यता प्राप्त नहीं है, सीधे सरकार को अपनी मांगों और सेवा संबंधी मामलों को लेकर पत्र नहीं भेज सकेंगे। शासन ने स्पष्ट किया है कि गैर-मान्यता प्राप्त संगठनों की ओर से भेजे जाने वाले पत्रों और अभ्यावेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, भविष्य में इस तरह का पत्राचार जारी रखने पर संबंधित पदाधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
नगरीय प्रशासन विभाग ने जारी किए निर्देश
नगरीय शासन एवं विकास विभाग ने इस संबंध में प्रदेश के नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों के लिए निर्देश जारी किए हैं। विभाग के मुताबिक, यह देखने में आया है कि कई ऐसे अधिकारी-कर्मचारी संघ, जिन्हें राज्य शासन से औपचारिक मान्यता नहीं मिली है, वे अपनी विभिन्न मांगों और सेवा संबंधी मामलों को लेकर सीधे शासन स्तर पर पत्राचार कर रहे हैं।
शासन ने अब इस व्यवस्था पर सख्ती बरतने का निर्णय लिया है। निर्देश के अनुसार केवल विधिवत मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों की ओर से भेजे गए पत्रों और अभ्यावेदनों पर ही शासन स्तर पर विचार किया जाएगा।
व्यक्तिगत समस्याओं के लिए अपनानी होगी प्रक्रिया
शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी को अपनी व्यक्तिगत सेवा संबंधी समस्या, मांग या शिकायत रखनी है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने निकाय प्रमुख के माध्यम से अभ्यावेदन प्रस्तुत करना होगा।
यानी कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान के लिए आवेदन कर सकेंगे, लेकिन इसके लिए विभागीय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।
नियमों का उल्लंघन करने पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में किसी गैर-मान्यता प्राप्त संघ के नाम से शासन स्तर पर पत्राचार किया जाता है, तो संबंधित पदाधिकारियों और इसमें संलग्न कर्मचारियों के विरुद्ध सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
शासन ने इस तरह के अनधिकृत पत्राचार को अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा है और सभी नगरीय निकायों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
नगरीय निकायों के कर्मचारी संगठनों पर पड़ेगा असर
राज्य शासन के इस फैसले से नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में सक्रिय कर्मचारी संगठनों के लिए शासन के समक्ष सामूहिक मांगें रखने की प्रक्रिया स्पष्ट हो गई है। अब मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघों के माध्यम से ही सामूहिक मांगें शासन तक पहुंचाई जा सकेंगी। वहीं व्यक्तिगत सेवा संबंधी मामलों के लिए कर्मचारियों को अपने निकाय प्रमुख के माध्यम से आवेदन करना होगा।









