रायपुर | छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक ऐसी खबर सामने आई है जो राज्य में नक्सलवाद के खात्मे की आधिकारिक घोषणा जैसी प्रतीत हो रही है। दंडकारण्य के जंगलों में ढाई दशकों तक खौफ का पर्याय रहा खूंखार माओवादी नेता पापाराव उर्फ सुनम चंदरैय्या अब बंदूक छोड़कर लोकतंत्र की मुख्यधारा में शामिल होने जा रहा है।
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस ऐतिहासिक घटनाक्रम की पुष्टि की है। उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा: “पापाराव ढाई दशकों से सक्रिय था और कई बड़ी मुठभेड़ों में शामिल रहा। मेरी स्वयं उससे बात हुई है, उसने और उसके साथियों ने पुनर्वास का मन बना लिया है। अब छत्तीसगढ़ में डीकेएसजेडसी (DKSZDC) स्तर का कोई भी नक्सली नेता सक्रिय नहीं बचा है।”
डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का पूर्ण समापन करना है। उन्होंने नक्सलियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अब जंगलों में बंदूक लेकर घूमने, आईईडी बिछाने या विकास कार्यों को रोकने का समय समाप्त हो चुका है। बस्तर के कोने-कोने में भारत का संविधान लागू होकर रहेगा।
कौन है पापाराव? (ताड़मेटला कांड का मास्टरमाइंड)
पापाराव का सरेंडर करना माओवादी संगठन के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका है। स्थानीय दोरला जनजाति से ताल्लुक रखने वाला पापाराव संगठन में नेतृत्व स्तर तक पहुँचने वाला गिने-चुने आदिवासियों में से एक है। उसे सुनम चंदरैय्या, मंगू दादा और चंद्रन्ना के नाम से भी जाना जाता है।छत्तीसगढ़ सरकार ने उस पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। साल 2010 में हुए भीषण ताड़मेटला कांड (जिसमें 76 जवान शहीद हुए थे) का मास्टरमाइंड पापाराव को ही माना जाता है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में चल रही है ‘निकलने’ की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, पापाराव वर्तमान में बीजापुर जिले के इंद्रावती टाइगर रिजर्व इलाके में अपने दस्ते के साथ मौजूद है। वह अपने साथ 18 अन्य साथियों और भारी मात्रा में आधुनिक हथियारों के साथ बाहर निकलेगा। पुलिस और प्रशासन की टीमें उनके सुरक्षित बाहर निकलने और आत्मसमर्पण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे रही हैं।
सरेंडर की मुख्य वजहें
पापाराव ने मुख्यधारा में लौटने के लिए तीन प्रमुख कारणों का उल्लेख किया है:
- सुरक्षा बलों का जंगलों में बढ़ता दबाव।
- नक्सल संगठन के भीतर कठिन और अनिश्चित जीवन।
- छत्तीसगढ़ सरकार की प्रभावी पुनर्वास नीति।
डिप्टी सीएम के अनुसार, अब केवल 40-45 नक्सली ही शेष बचे हैं, जो अगले सात दिनों के भीतर पुनर्वास की प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। यह कदम न केवल बस्तर में शांति लाएगा, बल्कि स्कूल, अस्पताल, मोबाइल टावर और सड़कों जैसे विकास कार्यों की राह भी आसान करेगा।









