रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सली संगठन के भीतर गहरी फूट और अविश्वास खुलकर सामने आने लगा है। दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी (DKSZC) ने एक पर्चा जारी कर माओवादी नेता मनीष कुंजाम और सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि दोनों ने ‘कोयापराष्ट्रवादी समूहों’ और केंद्र–राज्य सरकारों के इशारों पर माओवादी कैडरों को भड़काया और संगठन के खिलाफ गलत बयानबाज़ी की।
हिड़मा और शंकर की मौत पर आरोप–प्रत्यारोप
जारी पर्चे में DKSZC ने हाल ही में चर्चित माओवादी कमांडर हिड़मा और शंकर की मौत से जुड़ी ‘अफवाहों’ पर भी नाराज़गी जताई है। संगठन ने कहा कि इन मौतों के पीछे सुरक्षा बलों की कार्रवाई थी, लेकिन कुछ बाहरी समूह गलत सूचनाएँ फैलाकर संगठन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
आंतरिक गुटबाजी और विश्वासघात की स्वीकारोक्ति
नक्सल संगठन ने दस्तावेज़ में यह स्वीकार किया है कि हाल के महीनों में कई कैडर या तो पकड़े गए या आत्मसमर्पण के लिए मजबूर हुए। पर्चे के अनुसार,
- सूचना लीक,
- आंतरिक अविश्वास, और
- संगठन के भीतर विश्वासघात
जैसे कारणों से कई माओवादी मारे गए या गिरफ्तार हुए।
संगठन ने आरोप लगाया कि कुछ सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक रूप से सक्रिय समूह कैडरों को ‘सुरक्षित इलाकों’ से बाहर निकालकर सुरक्षा बलों के सामने कमजोर स्थिति में ला रहे हैं।
जांच की मांग, लेकिन सवाल कायम
DKSZC ने अपने पर्चे में मनीष कुंजाम और सोनी सोढ़ी के बयानों को “झूठा और भ्रामक” बताया है और उनके खिलाफ जांच की मांग की है। हालांकि पूरे दस्तावेज़ में यह भी साफ है कि यह विवाद संगठन के भीतर बढ़ते नेतृत्व संकट और मतभेद को प्रमाणित करता है।
सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी निगरानी
पर्चा सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सली संगठन में बढ़ती अस्थिरता का संकेत मान रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि हिड़मा जैसे शीर्ष नेताओं के खत्म होने के बाद संगठन में रणनीतिक टूटन, भ्रम, और कमांड के अभाव जैसी स्थिति साफ दिख रही है।
दक्षिण बस्तर में तनाव
इस पर्चे के बाद दक्षिण बस्तर और नक्सल प्रभावित इलाकों में तनाव और बढ़ गया है। स्थानीय गाँवों में अफवाहें और दहशत का माहौल है। सुरक्षा बलों ने कई संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ा दी है और हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।









