रायपुर में चल रहे छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र 2026 के छठवें दिन सोमवार को सदन में जमकर हंगामा हुआ। प्रश्नकाल के दौरान बस्तर संभाग में धान खरीदी का मुद्दा उठने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
32 हजार से ज्यादा किसानों की धान खरीदी का मुद्दा
कांग्रेस विधायक कवासी लखमा ने खाद्य मंत्री से सवाल करते हुए कहा कि बस्तर संभाग के 32 हजार 200 से अधिक आदिवासी किसानों से धान खरीदी नहीं हुई है। उनका कहना था कि कई किसानों का पंजीयन और टोकन जारी होने के बावजूद उनका धान नहीं खरीदा गया।
लखमा ने कहा कि बस्तर के किसानों का करीब 206 करोड़ रुपये बकाया है। ऐसे में जिन किसानों ने कर्ज लिया है, उनका भुगतान कैसे होगा और उनका कर्ज कौन चुकाएगा।
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल का जवाब
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि जिन किसानों ने खरीदी केंद्रों तक धान पहुंचाया, उनका धान खरीदा गया है। उन्होंने कहा कि जो किसान धान लेकर केंद्र तक नहीं पहुंचे, उनका धान नहीं खरीदा जा सका। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार सभी किसानों का धान खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है और यह कहना गलत है कि किसानों का धान नहीं खरीदा गया।
भूपेश बघेल ने भी सरकार को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि बस्तर में ऐसे कितने किसान हैं जिन्हें दूसरा टोकन जारी हुआ लेकिन वे धान नहीं बेच पाए। उन्होंने यह भी पूछा कि जिन किसानों ने केसीसी के तहत कर्ज लिया है, उनका धान खरीदा जाएगा या सरकार उनका कर्ज माफ करेगी।
दूसरे राज्यों में धान बेचने का आरोप
कवासी लखमा ने आरोप लगाया कि बस्तर के कई किसान मजबूरी में आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में जाकर धान बेच रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इसके प्रमाण के तौर पर सूची भी सदन में पेश की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को केस दर्ज कर परेशान किया जा रहा है।
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष
खाद्य मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायकों ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे की स्थिति बनने पर विपक्ष ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
अफीम की खेती का मुद्दा भी गूंजा
इस बीच नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने विनायक ताम्रकार द्वारा अफीम की खेती किए जाने के मामले पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष का कहना है कि यह राज्य की सुरक्षा और संस्कृति से जुड़ा गंभीर विषय है। डॉ. महंत ने आरोप लगाया कि सरकार दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है और प्रदेश में धान की जगह अफीम की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
“धान का कटोरा बनाम अफीम का कटोरा”
विपक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान ‘धान का कटोरा’ के रूप में है, लेकिन सरकार की नीतियों के कारण यह अब ‘अफीम का कटोरा’ बनने की ओर बढ़ रहा है। शून्यकाल में भी यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि राजधानी से करीब 50 किलोमीटर दूर एक व्यक्ति द्वारा निजी जमीन पर अफीम की खेती की जा रही है और इसे प्रशासनिक संरक्षण मिल रहा है।









