छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन का मुद्दा गर्मा गया। विपक्ष द्वारा पेश स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा न होने के कारण विधानसभा की कार्यवाही हंगामेदार हो गई। कांग्रेस के विधायकों ने स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग के बाद गर्भगृह में प्रवेश कर नारेबाजी की, जिसके चलते उन्हें स्वतः निलंबित कर दिया गया।
स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा से इनकार
विपक्ष ने हसदेव अरण्य और अन्य वन क्षेत्रों में खनन के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग की थी। लेकिन सरकार की ओर से जवाब दिए जाने के बाद आसंदी ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायकों ने गर्भगृह में प्रवेश कर हंगामा किया, जिससे कार्यवाही बाधित हुई।
भूपेश बघेल का हमला
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हसदेव अरण्य में पहले विधानसभा में यह संकल्प पारित हुआ था कि कोई खदान नहीं खोली जाएगी, फिर भी जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरगुजा से लेकर बस्तर तक वन क्षेत्र तेजी से नष्ट हो रहे हैं और मंत्री गंभीर सवालों का जवाब देने के बजाय बस्तर ओलंपिक जैसे विषयों पर बात कर रहे हैं।
भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य में कोयला खनन बढ़ावा देना पर्यावरण के लिए खतरा है, जबकि सोलर ऊर्जा जैसी विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने जंगल कटाई को बिजली उत्पादन और औद्योगिक लाभ के लिए गैर-जिम्मेदार कदम बताया।
“सरकार सिर्फ दो बड़े उद्योगपतियों के हित में काम कर रही है। आदिवासी क्षेत्रों में खनन को बढ़ावा देकर खनिज संपदा की लूट हो रही है।” – भूपेश बघेल
वन मंत्री केदार कश्यप का पलटवार
वन मंत्री केदार कश्यप ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार वन, वन्यजीव, आदिवासी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बस्तर ओलंपिक का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें 3 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
कश्यप ने वन संरक्षण के आंकड़े भी पेश किए:
- गुरु घासीदास तमोर पिंगला देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व बना।
- कोपरा जलाशय प्रदेश की पहली रामसर साइट घोषित हुई।
- पिछले दो वर्षों में वन आवरण में 94.75 वर्ग किमी की वृद्धि।
- ‘ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट’ क्षेत्र में 702 वर्ग किमी की बढ़ोतरी।
वन मंत्री ने स्पष्ट किया कि खनन पूरी तरह नियमों के तहत किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में 5 खनन प्रकरणों में 1300.869 हेक्टेयर वन भूमि का नियमानुसार उपयोग हुआ और इसके बदले 1780 हेक्टेयर में लगभग 17.8 लाख पौधे रोपे जाएंगे। सभी कार्यवाही FRA, ग्रामसभा और केंद्र सरकार की स्वीकृति के तहत हुई है।
सुप्रीम कोर्ट और NGT के निर्देशों का पालन
कश्यप ने बताया कि ICFRE और WII की रिपोर्ट के अनुसार परसा ईस्ट-बासेन और परसा कोल ब्लॉक “Can be considered” श्रेणी में हैं। सरकार ने वन और पर्यावरण संरक्षण के सभी निर्देशों का पालन किया है।








