रायपुर। छत्तीसगढ़ के छोटे और मध्यम आकार के निजी अस्पतालों की नींद अब उड़ने लगी है। आयुष्मान योजना के पंजीयन और उपचार व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए बनाए गए नए विभागीय पोर्टल हेम 2.0 ने छोटे अस्पतालों के लिए कई कठिन नियम लागू कर दिए हैं।
तीन एमबीबीएस डाक्टरों की तैनाती अनिवार्य
नए नियम के अनुसार 20 बेड वाले अस्पताल में 24 घंटे यानी तीन शिफ्ट के लिए तीन एमबीबीएस डाक्टरों की तैनाती अनिवार्य कर दी गई है। अस्पताल संचालकों का कहना है कि छोटे अस्पतालों में इस खर्च को वहन करना मुश्किल है। इससे पहले बीएएमएस या अन्य पैथी के डॉक्टरों की मदद से काम चल जाता था, अब यह संभव नहीं होगा।
सर्जन और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवा सीमित
हेम 2.0 पोर्टल ने सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ जैसे डॉक्टरों को तीन हॉस्पिटलों तक सीमित कर दिया है। इससे कई अस्पतालों में सर्जरी प्रभावित होने और मरीजों की उपचार सुविधा बाधित होने की आशंका है।
31 जनवरी तक सूचना अनिवार्य
पोर्टल में 31 जनवरी तक सभी निजी अस्पतालों को जानकारी भरनी अनिवार्य है। इस डेटा के आधार पर ही आयुष्मान और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं में पात्र अस्पतालों की सूची बनाई जाएगी। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इससे अस्पतालों द्वारा मनमानी पर रोक लगेगी और मरीजों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
लंबित भुगतान का असर
आयुष्मान योजना के लंबित भुगतान की वजह से अब मरीजों को उपचार में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल मरीजों को सीधे इंकार तो नहीं कर रहे हैं, लेकिन भुगतान आधारित इलाज के लिए बार-बार मनाने की कोशिश कर रहे हैं। बकाया लगभग 6 सौ करोड़ रुपये के लिए विभिन्न संगठनों ने चेतावनी जारी की है।
अस्पताल संचालकों ने जताई चिंता
आईएमए हॉस्पिटल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र शुक्ला ने कहा कि छोटे अस्पतालों में तीन एमबीबीएस डॉक्टर की उपलब्धता अव्यवहारिक है। एएचपीआई के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि यह नियम छोटे और मध्यम अस्पतालों को योजना से बाहर करने का प्रयास प्रतीत होता है।









