रायपुर। छत्तीसगढ़–आंध्र प्रदेश सीमा पर आज तड़के सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच हुई भयंकर मुठभेड़ में दक्षिण बस्तर का सबसे खतरनाक माओवादी नेता माड़वी हिडमा और उसकी पत्नी राजे उर्फ राजक्का मारे गए। सुरक्षा बलों को मिली यह अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
हिडमा PLGA बटालियन नंबर-1 का कमांडर था और CPI (माओवादी) की केंद्रीय समिति में बस्तर क्षेत्र का एकमात्र आदिवासी सदस्य था। उसके सिर पर 1 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम था। पिछले 20 सालों में दर्जनों बड़े हमलों की जिम्मेदारी हिडमा के नेतृत्व वाली बटालियन पर थी।
छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने रायपुर में प्रेस कांफ्रेंस कर इसकी आधिकारिक पुष्टि की। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार और सुरक्षा बलों का अभियान लगातार जारी है। बहुत जल्द बस्तर के कोने-कोने में भारत का संविधान पूरी मजबूती से लागू होगा और यह क्षेत्र नक्सल मुक्त होकर विकास की मुख्य धारा में जुड़ेगा।”
गृह मंत्री ने बताया कि हिडमा के परिवार से भी मुलाकात की गई है। परिवार का जीवन पूरी तरह सामान्य है और उन्होंने भी हिडमा से पुराने रास्ते पर लौटने की अपील की थी। विजय शर्मा ने सभी सक्रिय माओवादियों से सीधी अपील की, “हथियार डाल दीजिए, बिना हथियार के आएं। हम सेफ कोरिडोर बनाकर आपको सुरक्षित सरेंडर का पूरा मौका देंगे। राज्य की पुनर्वास नीति में शामिल होकर नया जीवन शुरू करें।”
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार यह मुठभेड़ दक्षिण बस्तर के घने जंगलों में हुई और इसमें DRG, STF तथा CRPF की संयुक्त टीम शामिल थी। हिडमा के मारे जाने से माओवादी संगठन के सैन्य ढांचे को गहरा झटका लगा है।










