भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स के आखिरी के दिन शानदार साबित हो रहे हैं. एथलेटिक्स और बॉक्सिंग में आ रहे मेडल के साथ ही पैरा-एथलेटिक्स में भी सफलता हाथ लग रही है. ऐसी ही एक बड़ी जीत भारत को दिलाई पैरा-एथलीट सोमन राणा ने. मेंस पैरा-शॉट पट F57 इवेंट में भारत के सोमन राणा ने गोल्ड मेडल जीत कर अपना नाम इतिहास में लिखवा दिया है. भारतीय सेना के इस जवान ने फाइनल में 13.40 मीटर के थ्रो के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया. सिर्फ सोमन ही नहीं, बल्कि शुभम जुयाल ने दूसरा स्थान हासिल कर देश की चांदी भी करवा दी.
सोमन राणा गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय
ग्लासगो गेम्स में शनिवार 1 अगस्त को सारी नजरें भारत के मुक्केबाजों पर थी क्योंकि 10 बॉक्सर फाइनल में पहुंचे थे. मगर इस बीच पैरा-एथलेटिक्स में सोमन राणा और शुभम जुयाल अपना कमाल दिखा रहे थे. इस इवेंट में दूसरे देशों के एथलीट भी हिस्सा ले रहे थे लेकिन असली मुकाबला दोनों भारतीयों के बीच देखने को मिला. एक वक्त पर शुभम जुयाल 13.08 मीटर के साथ पहले स्थान पर थे लेकिन फिर अनुभवी पैरा-एथलीट सोमन ने अपना कमाल दिखाया और 13.40 मीटर के साथ पहला स्थान हासिल करते हुए गोल्ड मेडल जीत लिया. इसके साथ ही CWG में इस इवेंट का गोल्ड जीतने वाले वो पहले एथलीट बन गए.
J&K में ब्लास्ट में गंवाया पैर, छोड़नी पड़ी बॉक्सिंग
सोमन राणा की ये सफलता बहुत ही खास, ऐतिहासिक और प्रेरक है. सिर्फ इसलिए नहीं क्योंकि उन्होंने पैरा-एथलीट होकर ये मेडल जीता है बल्कि इसलिए भी कि जिन हालातों से गुजरकर वो यहां तक पहुंचे वो हैरान करने वाले हैं. सोमन राणा भारतीय सेना में हवलदार के पद पर तैनात हैं और करीब पिछले डेढ़ दशक से पैरा एथलेटिक्स में सक्रिय हैं. मगर पैरा-शॉट पट में आने से पहले वो बॉक्सिंग में एक्टिव थे.
ये सब 2005 तक था. बिहार से आने वाले सोमन तब सेना के लिए ही बॉक्सिंग करते थे. फिर 2005 में जम्मू-कश्मीर में एक पेट्रोलिंग के दौरान एक लैंड-माइन ब्लास्ट की चपेट में आ गए, जिसके चलते उन्होंने अपना एक पैर गंवा दिया. इसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी. उन्हें न सिर्फ एक पैर के सहारे आगे बढ़ना पड़ा, बल्कि अपना गेम भी बदलना पड़ा. मगर उन्होंने हार नहीं मानी और इसका परिणाम उन्हें मिला. 2022 में पैरा एशियन गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता और फिर 2025 में पैरा-वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया.
शुभम को मिला सिल्वर
वहीं इस इवेंट में एक वक्त पर नंबर-1 चल रहे शुभम जुयाल को अपने सीनियर सोमन के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा. फिर भी पहली बार गेम्स में हिस्सा ले रहे शुभम ने सिल्वर मेडल जरूर अपने नाम किया. सोमन की ही तरह शुभम भी भारतीय सेना का हिस्सा हैं और लांस नायक के रूप में सक्रिय हैं. उत्तराखंड के रुड़की से आने वाले 2012 में वो जब आर्मी कैडेट कॉलेज में इंटरव्यू के लिए जा रहे थे, तभी उनकी बाइक का एक्सीडेंट हो गया, जिसमें उन्होंने एक पैर गंवा दिया. इसके बाद सेना ने उनके लिए आर्टिफिशियल पैर लगाया और फिर उन्होंने भी पैरा-शॉट पट में अपने करियर को आगे बढ़ाया. CWG की सफलता बताती है कि न तो ये फैसला गलत था और न ही शुभम का जज्बा कम है.










