धमतरी। छत्तीसगढ़ सरकार की ‘आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति’ से प्रभावित होकर और पुलिस के बढ़ते दबाव के चलते प्रतिबंधित ओड़िसा राज्य कमेटी के 9 माओवादियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। शुक्रवार को इन नक्सलियों ने एसपी सूरज सिंह परिहार के समक्ष इंसास राइफल, एसएलआर और कार्बाइन जैसे खतरनाक हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया।
बड़े इनामी चेहरों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता
सरेंडर करने वाले माओवादियों पर कुल 47 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें सचिव और कमांडर स्तर के बड़े नक्सली शामिल हैं:
- ज्योति उर्फ रेखा (DVCM): सीतानदी एरिया कमेटी की सचिव, जिस पर 8 लाख रुपये का इनाम था। इसके पास से इंसास राइफल बरामद हुई।
- उषा उर्फ बालम्मा (DVCM): टेक्निकल एक्सपर्ट, जो हथियारों की रिपेयरिंग करती थी। इस पर भी 8 लाख रुपये का इनाम था।
- रामदास मरकाम (ACM): पूर्व गोबरा एलओएस कमांडर, जिस पर 5 लाख रुपये का इनाम और 25 से अधिक अपराध दर्ज हैं।
- रोनी उर्फ उमा (कमांड): सीतानदी एरिया कमेटी कमांडर, इस पर 5 लाख रुपये का इनाम था।
अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा सौंपा
नक्सलियों ने केवल आत्मसमर्पण ही नहीं किया, बल्कि संगठन के महत्वपूर्ण हथियार भी पुलिस को सौंप दिए:
- हथियार: 2 नग इंसास राइफल, 2 नग एसएलआर (SLR), 1 नग कार्बाइन, और 1 भरमार बंदूक।
- गोला-बारूद: विभिन्न मैगजीन, 60 से अधिक जिंदा कारतूस और संचार के लिए वॉकी-टॉकी सेट।
पुलिस की रणनीति आई काम
एसपी सूरज सिंह परिहार ने बताया कि जिले में सक्रिय माओवादी कमेटियों को खत्म करने के लिए डीआरजी (DRG), सीआरपीएफ (CRPF) और जिला पुलिस द्वारा लगातार ‘सर्च ऑपरेशन’ चलाया जा रहा था। साथ ही, जंगल के भीतर पोस्टर-बैनर और पूर्व में सरेंडर कर चुके साथियों के संदेशों के माध्यम से इन तक सरकार की योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जा रही थी। हिंसा और विनाश के मार्ग से तंग आकर इन माओवादियों ने अब शांति का रास्ता चुना है।
माओवादियों का प्रोफाइल और इतिहास
सरेंडर करने वाले नक्सली बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर जैसे संवेदनशील इलाकों के मूल निवासी हैं। इनमें से कई 2002 और 2006 से संगठन में सक्रिय थे। उषा उर्फ बालम्मा जैसी नक्सली तेलंगाना से आकर छत्तीसगढ़ में सक्रिय थी और ‘टेक्निकल विंग’ की कमान संभाल रही थी।







