रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन द्वारा वार्ड अध्यक्षों की सूची जारी करने के महज दो घंटे के भीतर ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने उसे निरस्त कर दिया। बिना पूर्व अनुमोदन के सूची जारी करने पर पार्टी के भीतर भारी बखेड़ा मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
शुक्रवार रात करीब 9 बजे शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन ने शहर के 70 में से 66 वार्डों के लिए अध्यक्षों की सूची जारी की थी। इस सूची की खास बात यह थी कि 13 बड़े वार्डों में एक अध्यक्ष के साथ-साथ एक कार्यकारी अध्यक्ष की भी नियुक्ति की गई थी। अध्यक्ष का तर्क था कि इन वार्डों का क्षेत्रफल बड़ा होने के कारण कामकाज की सुविधा के लिए यह कदम उठाया गया है।
PCC ने दिखाया सख्त रुख, 2 घंटे में आदेश निरस्त
जैसे ही सूची सार्वजनिक हुई, कांग्रेस के भीतर ही विरोध के स्वर उठने लगे। मामला प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के वरिष्ठ पदाधिकारियों तक पहुँचा। अनुशासन और प्रक्रिया के उल्लंघन को देखते हुए PCC के महामंत्री मलकीत सिंह गैंदू ने तत्काल एक आदेश जारी कर पूरी सूची को प्रभावशून्य (निरस्त) कर दिया।

विवाद के मुख्य कारण
पार्टी के प्रोटोकॉल के अनुसार, किसी भी स्तर की कार्यकारिणी या नियुक्तियों के लिए पीसीसी का लिखित अनुमोदन अनिवार्य है, जो इस मामले में नहीं लिया गया था। वार्ड स्तर पर कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के फैसले पर भी सवाल उठे, क्योंकि आमतौर पर जिला या ब्लॉक स्तर पर ही ऐसे पद होते हैं। अभी भी कई जिलों में जिला कार्यकारिणी का गठन लंबित है, ऐसे में बिना सहमति के वार्ड अध्यक्षों की घोषणा को अनुशासनहीनता माना गया।
बैकफुट पर शहर अध्यक्ष
सूची निरस्त होने के बाद शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने स्वीकार किया कि अब वार्ड अध्यक्षों की नई सूची प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के विधिवत अनुमोदन के बाद ही जारी की जाएगी। इस घटना ने रायपुर कांग्रेस में गुटबाजी और समन्वय की कमी को एक बार फिर उजागर कर दिया है, जिससे पार्टी की काफी किरकिरी हो रही है।










