नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने रत्न एवं आभूषण क्षेत्र में बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए सोना, चांदी और प्लैटिनम से बने आभूषणों के आयात पर कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। विदेश व्यापार महानिदेशालय द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के मुताबिक, इन कीमती धातुओं से बने आभूषणों की आयात नीति को ‘मुक्त’ श्रेणी से हटाकर ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाल दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
क्या बदला है?
नई व्यवस्था के तहत अब कोई भी व्यापारी या कंपनी बिना सरकारी अनुमति के विदेश से सोने, चांदी या प्लैटिनम के आभूषण आयात नहीं कर सकेगी। इसके लिए DGFT से विशेष लाइसेंस या पूर्व-अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले से किए गए सौदों या एडवांस भुगतान पर भी यह नियम लागू होगा- यानी हर हाल में लाइसेंस लेना जरूरी होगा।
फैसले के पीछे की वजह
सरकार का यह कदम मुख्य रूप से ‘मुक्त व्यापार समझौतों’ यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है।
जानकारी के अनुसार, कुछ आयातक आसियान देशों- खासकर थाईलैंड और इंडोनेशिया से साधारण आभूषणों के नाम पर बड़ी मात्रा में कीमती धातुएं कम शुल्क पर भारत ला रहे थे। इससे:
- सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा था
- घरेलू ज्वैलरी उद्योग को नुकसान पहुंच रहा था
- बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा हो रही थी
किन्हें मिली राहत?
सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कुछ श्रेणियों को छूट भी दी है:
- 100% निर्यात-उन्मुख इकाइयाँ (EOU)
- विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) में स्थित कंपनियाँ
- रत्न एवं आभूषण निर्यात योजनाओं के तहत होने वाला आयात
इन पर नए प्रतिबंध लागू नहीं होंगे।
उद्योग पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का अल्पकालिक असर बाजार में दिखाई दे सकता है। सोने-चांदी की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी या उतार-चढ़ाव संभव है। हालांकि, लंबी अवधि में यह कदम भारतीय ज्वैलरी उद्योग को मजबूत करेगा।
उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार को अब लाइसेंस प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाना चाहिए, ताकि ईमानदार कारोबारियों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना न करना पड़े।







