रायपुर। छत्तीसगढ़ में भूखंड खरीदने के बाद भी जरूरी सुविधाओं और विकास कार्यों के लिए इंतजार कर रहे लोगों के हित में छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CG-RERA) ने अहम आदेश जारी किया है। रायपुर के सेजबहार स्थित ‘वात्सल्य गौरव-1, फेज-1’ परियोजना में विकास कार्य अधूरे रहने और पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं मिलने पर प्राधिकरण ने प्रमोटर को संबंधित आबंटी को 6 लाख 87 हजार 496 रुपये ब्याज देने का निर्देश दिया है। इसके अलावा पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने तक हर महीने 7,314 रुपये का भुगतान भी करना होगा।
2019 से अक्टूबर 2026 तक ब्याज देने का आदेश
CG-RERA के आदेश के अनुसार, आबंटी द्वारा जमा की गई 8 लाख 12 हजार 643 रुपये की राशि पर वर्ष 2019 से अक्टूबर 2026 तक 10.80 प्रतिशत सालाना ब्याज दर के आधार पर गणना की गई है। इसके तहत प्रमोटर को कुल 6,87,496 रुपये ब्याज का भुगतान करना होगा।
इसके अतिरिक्त 1 नवंबर 2026 से परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने तक हर महीने 7,314 रुपये देने का निर्देश दिया गया है। इस तरह प्रमाण पत्र जारी होने तक प्रमोटर की भुगतान संबंधी जिम्मेदारी बनी रहेगी।
स्वीकृत ले-आउट के अनुसार पूरे नहीं हुए विकास कार्य
मामले की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण ने पाया कि सेजबहार स्थित ‘वात्सल्य गौरव-1, फेज-1’ परियोजना में स्वीकृत ले-आउट के मुताबिक विकास कार्य पूरे नहीं किए गए थे। इसके साथ ही सक्षम प्राधिकारी से पूर्णता प्रमाण पत्र भी प्राप्त नहीं किया गया था।
इन परिस्थितियों को देखते हुए प्राधिकरण ने रेरा अधिनियम, 2016 की धारा 18 के तहत ब्याज भुगतान का आदेश दिया। इस प्रावधान के तहत परियोजना से जुड़ी निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन नहीं होने पर आबंटी को नियमानुसार राहत दी जा सकती है।
रेरा पंजीयन नहीं कराने पर अलग से मामला दर्ज करने के निर्देश
प्राधिकरण ने परियोजना का रेरा पंजीयन नहीं कराए जाने के मुद्दे को भी गंभीरता से लिया है। आदेश के मुताबिक, रेरा अधिनियम की धारा 3 के दायरे में आने वाली परियोजनाओं का पंजीयन कराना अनिवार्य है।
इसके बावजूद पंजीयन नहीं कराए जाने के मामले में प्रमोटर के खिलाफ धारा 59 के तहत अलग प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।
सड़क, नाली, बिजली और पानी की सुविधाएं देना जरूरी
CG-RERA ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि केवल भूखंड बेच देना प्रमोटर की जिम्मेदारी पूरी होने के लिए पर्याप्त नहीं है। स्वीकृत योजना के अनुसार सड़क, नाली, बिजली, पेयजल और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाओं का विकास करना भी उसकी जिम्मेदारी है।
इसके साथ ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करना जरूरी है। विकास कार्य अधूरे रहने या अनिवार्य नियमों का पालन नहीं होने पर प्रमोटर के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
भूखंड खरीदने वालों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर
इस आदेश का उद्देश्य परियोजना में निर्धारित विकास कार्यों और कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना तथा भूखंड खरीदने वाले लोगों के हितों की रक्षा करना है। CG-RERA की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि प्रमोटर को स्वीकृत योजना के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराने और जरूरी प्रमाण पत्र हासिल करने की जिम्मेदारी निभानी होती है।
प्राधिकरण के निर्देश के अनुसार, संबंधित आबंटी को निर्धारित ब्याज राशि के साथ पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने तक मासिक भुगतान भी किया जाना है। वहीं, रेरा पंजीयन से जुड़े मामले में अलग कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।










