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‘करोड़पति’ भिखारी: 3 मकान, 3 ऑटो और कार का मालिक; भीख मांगने के साथ चलाता था ‘ब्याज’ का धंधा

इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई दंग है। जिस भिखारी को लोग वर्षों से असहाय समझकर उसकी मदद कर रहे थे, वह असल में करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला। लकड़ी की पट्टियानुमा गाड़ी पर घिसटकर चलने वाला मांगीलाल, रेस्क्यू टीम की जांच में तीन पक्के मकानों, एक लग्जरी कार और तीन ऑटो रिक्शा का स्वामी पाया गया है।

रेस्क्यू ऑपरेशन में खुली पोल

महिला एवं बाल विकास विभाग की रेस्क्यू टीम को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सराफा बाजार में एक व्यक्ति विकलांगता का सहारा लेकर संदिग्ध रूप से भीख मांग रहा है। भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के तहत जब टीम ने उसे रेस्क्यू कर पूछताछ की, तो परत-दर-परत उसकी अमीरी का सच सामने आने लगा। मांगीलाल खुद को मजबूर दिखाकर लोगों की सहानुभूति बटोरता था, लेकिन उसका असल बैंक बैलेंस किसी रईस से कम नहीं था।

संपत्ति का साम्राज्य: 3 मंजिला इमारत और कार

रेस्क्यू टीम की जांच में मांगीलाल की जो संपत्तियां सामने आईं, वे किसी को भी हैरान कर सकती हैं:

  • तीन पक्के मकान: भगत सिंह नगर में एक 16×45 फीट की तीन मंजिला इमारत, शिवनगर में 600 स्क्वायर फीट का मकान और अलवास क्षेत्र में एक 1 BHK मकान।
  • वाहनों का काफिला: मांगीलाल के पास 3 ऑटो रिक्शा हैं जिन्हें वह किराए पर चलवाता है। इतना ही नहीं, उसके पास एक डिजायर कार (Four Wheeler) भी है, जिसे उसने कमाई के लिए लगा रखा है।
  • सरकारी मदद का भी उठाया लाभ: शासन ने उसकी विकलांगता देख उसे रेड क्रॉस सोसायटी के माध्यम से पहले ही एक मकान उपलब्ध कराया था, इसके बावजूद वह सड़कों पर भीख मांगता रहा।

भीख के साथ ‘ब्याज’ की वसूली

पूछताछ में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ। मांगीलाल ने स्वीकार किया कि वह सिर्फ भीख नहीं मांगता, बल्कि उसने सराफा क्षेत्र के कई लोगों को ब्याज पर पैसे दे रखे हैं। वह प्रतिदिन सराफा बाजार केवल दान लेने नहीं, बल्कि अपने ब्याज की मोटी रकम वसूलने भी जाता था। उसकी प्रतिदिन की कमाई 500 रुपये से अधिक है।

मांगीलाल की सफाई: “मैं जबरदस्ती नहीं करता”

पकड़े जाने पर मांगीलाल ने दलील दी कि उसने कभी किसी से जबरदस्ती पैसे नहीं मांगे। उसने कहा, “लोग मेरी हालत देखकर खुद पैसे देते हैं।” हालांकि, प्रशासन का कहना है कि संपन्न होने के बावजूद झूठी मजबूरी दिखाकर दान लेना धोखाधड़ी और अपराध की श्रेणी में आता है।

प्रशासन की चेतावनी

जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा और नोडल अधिकारी दिनेश मिश्रा ने स्पष्ट किया कि इंदौर को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए अभियान जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग समाज में गलत उदाहरण पेश करते हैं, जिससे वास्तविक जरूरतमंदों को मदद नहीं मिल पाती।



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