रायपुर। छत्तीसगढ़ में दुर्ग के बाद अब बलरामपुर जिले में बड़े पैमाने पर अफीम की अवैध खेती का खुलासा होने से हड़कंप मच गया है। इस मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने इसे गंभीरता से लेते हुए 10 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच दल का गठन किया है, जो प्रभावित गांवों का दौरा कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
फूलों की आड़ में ‘नशे की खेती’
बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत त्रिपुरी के घोसरापारा में लगभग 6.30 एकड़ जमीन पर अफीम की लहलहाती फसल मिली है। चौंकाने वाली बात यह है कि यहाँ फूलों की खेती की आड़ में अफीम उगाई जा रही थी। छापेमारी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में चीरे लगे अफीम के डोडे मिले हैं, जिनमें से 5 बोरी डोडा जब्त किया गया है।
भाजपा नेता का नाम आने से मचा बवाल
स्थानीय ग्रामीणों और शुरुआती जांच के अनुसार, इस अवैध कारोबार के तार भाजपा नेता और पूर्व सरपंच जिरमल राम से जुड़े होने के आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिरमल राम के माध्यम से ही झारखंड के लोगों ने स्थानीय किसानों से जमीन लीज पर ली थी। खेत की निगरानी का जिम्मा भी कथित तौर पर जिरमल राम ही संभाल रहा था।

कांग्रेस की 10 सदस्यीय जांच टीम
PCC अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर महामंत्री संगठन मलकीत सिंह गैंदू ने जांच दल की घोषणा की है।
- संयोजक: पूर्व विधायक डॉ. प्रीतम राम।
- प्रमुख सदस्य: पूर्व विधायक भानुप्रताप सिंह, पूर्व महापौर डॉ. अजय तिर्की सहित जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी।
- मिशन: टीम तुरंत गांव का दौरा करेगी, ग्रामीणों से चर्चा करेगी और अफीम की खेती के पीछे के ‘असली चेहरों’ को बेनकाब करने के लिए पीसीसी को रिपोर्ट सौंपेगी।
झारखंड कनेक्शन और पुलिसिया कार्रवाई
पुलिस ने मौके से खेती कर रहे झारखंड के 5 लोगों को हिरासत में लिया है। आरोपी फॉरेस्ट के नाले से पंप लगाकर सिंचाई करते थे। रायपुर से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और फॉरेंसिक टीम भी जांच के लिए बलरामपुर पहुंच रही है।








