महासमुंद: केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थल सिरपुर का दौरा किया। उनके साथ राज्य के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी मौजूद रहे। हेलीपैड पर सांसद रूपकुमारी चौधरी, विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, कलेक्टर विनय कुमार लंगेह और एसपी प्रभास कुमार ने केंद्रीय मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया।
पुरातात्विक स्थलों का निरीक्षण
केंद्रीय मंत्री ने दौरे के दौरान लक्ष्मण देवालय, आनंद प्रभु कुटी विहार, तीवरदेव विहार, सुरंग टीला और स्थानीय हाट बाजार का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने गंधेश्वर मंदिर पहुंचकर पूजा अर्चना की। उन्होंने सिरपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को उजागर करते हुए कहा कि यह स्थल न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे भारत की प्राचीन धरोहर का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने कहा कि सिरपुर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना आवश्यक है।
सुविधाओं को बेहतर बनाने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुरातात्विक स्थलों की मूल संरचना को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों की सुविधा के लिए सड़क, साइन बोर्ड, सूचना केंद्र, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाए। उन्होंने संरक्षण और संवर्धन कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की।
राज्य सरकार के सहयोग की पुष्टि
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार सिरपुर के समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थल पर्यटन के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित कर सके।
सिरपुर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता
सिरपुर का प्राचीन नाम श्रीपुर और श्रिपुरा था। यह महानदी के तट पर स्थित एक प्राचीन नगरी है, जिसका इतिहास 5वीं से 12वीं सदी तक फैला है। यह दक्षिण कोसल का प्रमुख राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है। यहाँ हिंदू, बौद्ध और जैन तीनों धर्मों के तीर्थ, मठ, मंदिर और विहार पाए जाते हैं। खुदाई में 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 10 बुद्ध विहार और 3 जैन विहार के अवशेष मिले हैं।
लक्ष्मण मंदिर: 6वीं-7वीं सदी का यह प्रमुख हिंदू मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इसे रानी वासटादेवी ने अपने पति राजा हर्षगुप्त की स्मृति में बनवाया था।
तीवरदेव विहार: 7वीं-8वीं सदी का प्राचीन बौद्ध विहार, जिसमें बुद्ध अनुयायियों के ध्यान, शिक्षा और धार्मिक क्रियाओं के अवशेष मिले।
आनंद प्रभु कुटी विहार: 14 कमरे वाला बड़ा बौद्ध मठ, जिसमें नक्काशीदार स्तंभ और बुद्ध की विशाल मूर्ति है।
सुरंग टीला: 7वीं सदी का मंदिर, जिसमें पांच गर्भगृह पाए गए हैं। इनमें शिवलिंग और गणेश प्रतिमाएं स्थित हैं।
केंद्रीय मंत्री ने सिरपुर के संरक्षण और पर्यटन विकास को लेकर आशावादी बयान देते हुए कहा कि यह स्थल छत्तीसगढ़ और भारत की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।







