रायपुर। छत्तीसगढ़ में पीएम पोषण योजना (पूर्व में मिड-डे मील) के तहत कार्यरत रसोइयों का अनिश्चितकालीन आंदोलन अब गंभीर और दुखद मोड़ पर पहुंच गया है। आंदोलन के दौरान अब तक दो महिला रसोइयों की मौत हो चुकी है, जिससे पूरे रसोइया समुदाय में शोक और आक्रोश का माहौल है। रसोइया संघ ने इन मौतों के लिए सीधे तौर पर शासन की उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया है।
धरना स्थल पर बिगड़ी तबीयत
जानकारी के मुताबिक, बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के सलधा गांव स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में पदस्थ रसोइया दुलारी यादव 29 दिसंबर 2025 से रायपुर में चल रहे धरना-प्रदर्शन में शामिल थीं। लगातार खुले में धरना देने और प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते उनकी तबीयत बिगड़ गई।
इलाज के दौरान हुई मौत
25 जनवरी 2026 को दुलारी यादव को इलाज के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें एक निजी अस्पताल रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना से धरना स्थल पर मौजूद रसोइयों में शोक की लहर दौड़ गई।
बालोद जिले की रसोइया का भी निधन
इसी बीच बालोद जिले के डौंडी ब्लॉक के कुसुमकसा गांव की रसोइया रुकमणी सिन्हा की भी आंदोलन के दौरान मौत हो गई। दो महिला रसोइयों की मौत ने पूरे राज्य के रसोइया समुदाय को झकझोर कर रख दिया है।
शासन पर गंभीर आरोप
छत्तीसगढ़ स्कूल मध्यान्ह भोजन रसोइया संघ का आरोप है कि सरकार लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है। संघ का कहना है कि रसोइयों को बेहद कम मानदेय, सामाजिक सुरक्षा का अभाव और लगातार बढ़ता कार्यभार झेलना पड़ रहा है, बावजूद इसके शासन ने अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि रसोइयों की मौत सीधे तौर पर शासन की असंवेदनशीलता का नतीजा है। यदि समय रहते उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाता, तो ऐसी दुखद घटनाएं रोकी जा सकती थीं। संघ ने मृतक रसोइयों के परिजनों को उचित मुआवजा, एक परिजन को सरकारी नौकरी और तत्काल मानदेय वृद्धि की मांग दोहराई है।








