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रात में स्क्रीन का इस्तेमाल बढ़ा सकता है डायबिटीज का खतरा: विशेषज्ञों की चेतावनी

नई दिल्ली। डायबिटीज, जो एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है, दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है। यह तब होता है जब शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता या इंसुलिन का पर्याप्त उत्पादन नहीं हो पाता, जिसके कारण रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। जहां पहले यह समस्या मुख्य रूप से खानपान और जीवनशैली से जुड़ी मानी जाती थी, वहीं अब विशेषज्ञों का मानना है कि देर रात तक स्क्रीन का इस्तेमाल भी ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्टफोन, टैबलेट और कंप्यूटर जैसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे शरीर के नींद हार्मोन मेलाटोनिन को प्रभावित करती है। मेलाटोनिन का कार्य हमारे शरीर के स्लीप साइकिल को नियंत्रित करना है। लेकिन, जब हम रात में इन स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी के संपर्क में आते हैं, तो यह हार्मोन के उत्पादन को बाधित करता है, जिससे नींद की गुणवत्ता खराब हो जाती है। इससे हमारे शरीर में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर बढ़ता है, जो ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ा सकता है।

मेलाटोनिन एक प्राकृतिक हार्मोन है, जो शरीर को सोने में मदद करता है। जब हम रात में नीली रोशनी से बचने के बजाय स्मार्टफोन और कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं, तो यह हमारे शरीर को यह सिग्नल देता है कि दिन का समय हो चुका है और मेलाटोनिन का उत्पादन रुक जाता है। इसके परिणामस्वरूप हमें पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती, जिससे शरीर का इंसुलिन उत्पादन प्रभावित होता है और ब्लड शुगर का नियंत्रण बिगड़ सकता है।

हाल ही में द लैंसेट रीजनल हेल्थ – यूरोप में प्रकाशित एक अध्ययन में यह सामने आया है कि रात के समय रोशनी के संपर्क में आने से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है, चाहे आप कितनी भी नींद लें। यह इसलिए है क्योंकि रात में रोशनी हमारे शरीर की आंतरिक घड़ी को प्रभावित करती है, जिससे शरीर की प्राकृतिक नींद चक्र में गड़बड़ी होती है और हम आराम करने की बजाय जागृत अवस्था में रहते हैं। इसके परिणामस्वरूप तनाव हार्मोन बढ़ता है और ब्लड शुगर का स्तर ऊपर चला जाता है।

अत्यधिक स्क्रीन समय के कारण नींद की लगातार कमी, इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता में कमी का कारण बन सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि यह इंसुलिन प्रतिरोध को जन्म देता है, जो बाद में मोटापा, डायबिटीज, और महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन और प्रजनन संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। वहीं, पुरुषों में इससे टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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