भारत-विरोधी कट्टरपंथी नेता हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में नए सिरे से हिंसा भड़क उठी है. इस्लामी कट्टरपंथी लगातार हिंदूओं को टारगेट कर रहे हैं. एक हिंदू ने अपने बेटे की पीट-पीटकर हत्या करने का खौफनाक मंजर बताया है. उनकी बातें सुनकर किसी भी इंसान की रुह कांप उठ जाएगी. बांग्लादेश में रहनेवाले अल्पसंख्यकों के लिए चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं.
मयमनसिंह की एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करने वाले दीपू चंद्र दास को गुरुवार रात इस्लाम का कथित तौर पर अपमान करने के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला गया. दास की हत्या करने के बाद, उनके बेजान शरीर को एक पेड़ से बांधकर आग लगा दी गई, और दर्जनों लोग इस बर्बरता का जश्न मनाते नजर आए.
पिता ने बताया कैसे हुई घटना
पीड़ित के पिता रविलाल दास ने घटना के बारे में बताया कि सरकार की तरफ से किसी ने कोई बात नहीं की. उन्हें अपने बेटे की हत्या की खबर सबसे पहले फेसबुक से मिली. दास ने बताया, “हमें फेसबुक से खबरें मिलनी शुरू हुईं, फिर और भी लोग इसके बारे में बात करने लगे. हमें तब पता चला जब किसी ने मुझे बताया कि उसे बुरी तरह पीटा गया है. आधे घंटे बाद मेरे चाचा आए और मुझे बताया कि कट्टरपंथी मेरे बेटे को ले गए और उसे एक पेड़ से बांध दिया. फिर उन्होंने उस पर केरोसिन डालकर आग लगा दी. उसका जला हुआ शरीर बाहर छोड़ दिया गया. उन्होंने जले हुए धड़ और सिर को बाहर बांध दिया. यह बहुत भयानक था. हम निश्चित रूप से नहीं कह सकते कि वे छात्र शिविर से थे या जमात-ए-इस्लामी से. कोई भी निश्चित रूप से नहीं कह सकता; यह सब लोगों की कही-सुनी बातें हैं.”
आतंकवादियों को मिल रहा शह
शेख हसीना सरकार में पूर्व सांसद और सूचना मंत्री मोहम्मद अली अराफात ने कहा है कि हादी की मौत के विरोध प्रदर्शनों की आड़ में कट्टरपंथी इस्लामी ताकतें बांग्लादेश की सड़कों पर कब्जा कर रही हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, “हादी के समर्थकों ने शुक्रवार (19 दिसंबर) को शाहबाग में शरीफ उस्मान हादी की हत्या के लिए न्याय की मांग करते हुए धरना दिया. बाद में यह कार्यक्रम जिहादी और कट्टरपंथी इस्लामी तत्वों के प्रभुत्व वाले जमावड़े में बदल गया, जिसमें तौहीदी जनता के जसीमुद्दीन रहमानी और अताउर रहमान बिक्रमपुरी जैसे नेता शामिल थे. अन्य चरमपंथी समूहों के सदस्य भी मौजूद थे और उन्होंने भड़काऊ भाषण दिए.”








