रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आज से ‘सुशासन तिहार’ की औपचारिक शुरुआत हो रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही जनता को राहत देना और लंबित पड़े प्रशासनिक कार्यों में गति लाना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप अब शासन की जवाबदेही गांवों तक तय की जाएगी।
जमीन से जुड़े मसलों पर फोकस: कलेक्टरों को सख्त निर्देश
सुशासन तिहार के पहले चरण में सरकार ने उन समस्याओं को प्राथमिकता दी है, जो आम नागरिक को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं। कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पट्टों और मालिकाना हक से जुड़े मामलों में तेजी लाई जाए। जमीन के बंटवारे, नामांतरण और सीमांकन के लंबित प्रकरणों को समयसीमा के भीतर निराकृत किया जाए।
बिजली-पानी की समस्याओं का तत्काल समाधान
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जीवन स्तर को सुधारने के लिए प्रशासन को दो प्रमुख मोर्चों पर सक्रिय किया गया है।
- निर्बाध बिजली आपूर्ति: बिजली कटौती की शिकायतों को दूर करना और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार।
- जल प्रबंधन: खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत और पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करना, ताकि गर्मी के मौसम में ग्रामीणों को परेशानी न हो।
जवाबदेही तय: लापरवाह अफसरों पर गिरेगी गाज
राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि सुशासन तिहार केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है। हर जिले को अपने कार्यों की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट भेजनी होगी। जिन क्षेत्रों में कार्य संतोषजनक नहीं पाए जाएंगे, वहां के जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाएगा।
एक्शन मोड में मुख्यमंत्री: खुद करेंगे ग्राउंड रियलिटी चेक
प्रशासनिक अमले को मुस्तैद रखने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं मैदान में उतरेंगे। वे प्रदेश के विभिन्न गांवों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) करेंगे। मुख्यमंत्री सीधे जनता से संवाद कर जानेंगे कि क्या सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुँच रहा है या नहीं।










