रायपुर। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल एक बार फिर विवादों में हैं। आठवीं पास वाहन चालक तबरेज आलम को निज सहायक बनाने का प्रयास असफल होने के बाद भी, उन्हें नवा रायपुर स्थित मंत्री आवास-कार्यालय में ‘निज सहायक’ की भूमिका में रखा गया है।
आवास के कक्ष में लगा “निज सहायक – तबरेज आलम” का बोर्ड इस पूरे प्रकरण को खुलकर सामने ला रहा है।सूत्रों का दावा है कि सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने योग्यता का हवाला देते हुए तबरेज आलम की नियुक्ति अस्वीकार कर दी थी। इसके बावजूद मंत्री के सरकारी आवास में वही उनके निजी स्टाफ की तरह काम कर रहा है। इससे सरकार की कार्यसंस्कृति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामला तब सुर्खियों में आया था, जब मंत्री द्वारा भेजे गए नियुक्ति प्रस्ताव को GAD ने यह कहते हुए खारिज किया था कि आठवीं पास तबरेज आलम ‘निज सहायक’ की पात्रता पूरी नहीं करता। इसके बाद विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया था, और कांग्रेस ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे। इस पूरे विवाद पर न तो मंत्री राजेश अग्रवाल का बयान आया और न ही भाजपा संगठन ने कोई प्रतिक्रिया दी। खासकर सरगुजा भाजपा संगठन और मंत्री के बीच दूरी होना राजनीतिक हलकों में पहले से चर्चा का विषय रहा है।
अब जब दोबारा मंत्री आवास में तबरेज आलम के नाम का बोर्ड दिखा है, सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह मंत्री की जिद है, उनका व्यक्तिगत भरोसा या फिर प्रशासनिक नियमों की अनदेखी। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि सरकार के मुखिया ने स्वयं मंत्री को इस मामले में समझाइश दी थी, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ।विशेषज्ञों का कहना है कि किसी मंत्री के लिए निज सहायक जैसी संवेदनशील भूमिका में योग्य, शिक्षित और प्रशासनिक कार्यों को समझने वाला व्यक्ति होना जरूरी है। यदि कोई मंत्री अपने वाहन चालक को ही अपनी टीम का सबसे महत्वपूर्ण सदस्य मानता है, तो यह जिम्मेदार पद की गरिमा और सरकार की छवि—दोनों के लिए गंभीर मसला है।










