रायपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रायपुर के सोनपैरी गांव में आयोजित हिंदू सम्मेलन में संबोधित करते हुए सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और परिवारिक मूल्य मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी अपने मन से भेदभाव और अलगाव हटाएं और हिंदू समाज में एकता को बढ़ावा दें। उनके अनुसार, सभी मंदिर, जलस्त्रोत और श्मशान गृह सभी के लिए खुले रहने चाहिए और किसी का मूल्यांकन उसकी जाति, संपत्ति या भाषा के आधार पर नहीं होना चाहिए।
भागवत ने अपने उद्बोधन में पांच ऐसे कार्य बताए, जिनके माध्यम से परिवार, समाज, देश और विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संकटों पर चर्चा करने की बजाय उनके समाधान पर सामूहिक रूप से काम करना चाहिए। साथ ही उन्होंने अरावली पर्वतमाला का उदाहरण देते हुए पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
परिवार और समाज में संवाद की आवश्यकता
सरसंघचालक ने कहा कि अकेलापन और व्यसन युवा पीढ़ी को प्रभावित करते हैं। इसके समाधान के लिए परिवारिक संवाद बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने मंगल संवाद और कुटुंब प्रबोधन जैसे उपाय सुझाए। उनका कहना था कि सप्ताह में कम से कम एक शाम परिवार के साथ बिताई जाए, जिसमें गपशप, भजन और प्रेरक व्यक्तित्वों पर चर्चा की जाए।
पर्यावरण संरक्षण और स्वावलंबन
भागवत ने पर्यावरण संरक्षण के उपायों को घर से शुरू करने की आवश्यकता बताई। वर्षा जल संरक्षण, पौधारोपण और प्लास्टिक विरोधी जीवनशैली को परिवारिक स्तर पर अपनाने से सकारात्मक बदलाव दिख सकते हैं। उन्होंने स्वावलंबन के लिए स्वबोध विकसित करने पर जोर दिया और कहा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों की जगह देश की कंपनियों को प्राथमिकता दें। भाषा, भोजन और रहन-सहन में भी स्वबोध का पालन करें।
संविधान और नियमों का पालन
सरसंघचालक ने नागरिकों से संविधान, नियम और कानून का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यही धार्मिक आचरण का वास्तविक रूप है।
संघ के सौ साल और देशभर में विस्तार
भागवत ने बताया कि संघ ने 100 साल पहले नागपुर में छोटी शाखा से शुरुआत की थी और अब देश के कोने-कोने में कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि संघ के कार्यकर्ता समाज की उन्नति के लिए खून-पसीना बहा रहे हैं और इसी क्रम में देशभर में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं।
विकास और पर्यावरण का संतुलन
मोहन भागवत ने एम्स रायपुर में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन इसे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना करना चाहिए। उन्होंने अरावली पर्वत श्रृंखला को उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन की रीढ़ बताया और कहा कि प्राकृतिक ढांचे को नष्ट करना आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरा है।
युवाओं के लिए संदेश
सरसंघचालक ने युवाओं से कहा कि अकेलापन और नशे की प्रवृत्ति को रोकने के लिए परिवारिक जुड़ाव जरूरी है। छोटे-छोटे कदम जैसे पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा से वे बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
भागवत के इस संबोधन ने परिवार, समाज, युवा और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर विकास की दिशा पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत पर जोर दिया।









