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हाई कोर्ट ने कहा: अदालत को डराने की कोशिश बर्दाश्त नहीं, इस मामले में हो रही थी सुनवाई

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा न्यायालय में चल रहे चेक बाउंस प्रकरण में आरोपियों के व्यवहार को अदालत को डराने का प्रयास बताते हुए गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह का आचरण न्यायालय की गरिमा के विपरीत है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हाई कोर्ट ने जिला अदालत से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश को प्रकरण को जेएमएफसी कोर्ट में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए, ताकि निष्पक्ष और निर्भीक वातावरण में न्यायिक प्रक्रिया जारी रहे।

आरोपियों का विरोध और धमकी

मामले में पता चला कि दोनों आरोपियों ने अदालत की कार्यवाही में व्यवधान डाला और पीठासीन अधिकारी को एक लिखित नोटिस थमाया। नोटिस में न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक और मानहानिकारक आरोप लगाए गए और यह भी कहा गया कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे सिमगा कोर्ट परिसर में आत्महत्या कर लेंगे।

डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि आरोपियों के आचरण में किसी प्रकार का वास्तविक पश्चाताप नहीं दिखता और उनके व्यवहार से अदालत को डराने की कोशिश सामने आती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अदालत में अभद्र भाषा और धमकी देना आपराधिक अवमानना के दायरे में आता है।

बाद में लिखित रूप में जताया खेद

अदालत ने कहा कि न्यायिक अनुशासन और मर्यादा सर्वोपरि है। दोनों पक्षकारों ने बाद में निचली अदालत में लिखित रूप से खेद व्यक्त किया, लेकिन मौखिक तौर पर उन्होंने कहा कि वे केवल क्षमा मांग रहे हैं, माफी नहीं। उनका तर्क था कि “माफी गलती की मांग होती है, जबकि क्षमा बड़ों से ली जाती है।”

हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई के लिए उचित निर्देश दिए और कहा कि न्यायालय की कार्यवाही में व्यवधान किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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