नारायणपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिला मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर दूर मेरोली नदी के किनारे बनी एक संदिग्ध कब्र ने पिछले दो हफ्तों से इलाके में भारी दहशत फैला रखी थी। फूल-माला, अगरबत्ती और जलते हुए दीपक के बीच दफन इस ‘राज’ को जब पुलिस और प्रशासन ने ग्रामीणों के सामने खोला, तो सबकी आंखें फटी रह गईं।
दहशत का कारण: कब्र के पास मिली पूजा सामग्री
ग्रामीणों के बीच खौफ का सबसे बड़ा कारण कब्र के आसपास का नजारा था। मेरोली नदी के पास जमीन में दबी इस कब्र के ऊपर जलता हुआ दीपक, फूल-माला, सिक्के और अगरबत्ती मिली थी। इन परिस्थितियों को देखकर गांव में यह चर्चा आम हो गई थी कि किसी की हत्या कर उसे यहां दफनाया गया है या फिर कोई तांत्रिक क्रिया की गई है।
सरपंच की शिकायत पर एक्टिव हुई पुलिस
बोरपाल गांव के सरपंच परमानंद नाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एड़का थाने में शिकायत दर्ज कराई। सरपंच ने स्पष्ट किया कि गांव का कोई भी व्यक्ति लापता नहीं है, फिर भी यह कब्र किसकी है? इसके बाद थाना प्रभारी सुदर्शन घ्रुव ने मिशन अस्पताल, जिला अस्पताल और आसपास के थानों से गुमशुदा लोगों का रिकॉर्ड खंगाला, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा।
कलेक्टर-एसपी के निर्देश पर पहुंची FSL की टीम
मामला इतना संवेदनशील हो गया कि कांकेर से एफएसएल (FSL) की तीन सदस्यीय विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया। कार्यपालिक मजिस्ट्रेट वेद प्रकाश साहू की मौजूदगी में और करीब 200 ग्रामीणों के सामने खुदाई की प्रक्रिया शुरू हुई। भारी सुरक्षा बल और डॉक्टरों की टीम (डॉ. प्रवीण और डॉ. दीप्ति) की निगरानी में जब मिट्टी हटाई गई, तो अंदर एक काले कुत्ते का शव मिला।
चार दिनों की जांच के बाद थमा अफवाहों का बाजार
जांच में यह साफ हो गया कि किसी ने अपने पालतू कुत्ते की मौत के बाद उसे पूरे विधि-विधान और आस्था के साथ वहां दफनाया था। पुलिस ने कुत्ते के शव को वापस दफन कर दिया है। एड़का पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के कोई जानकारी साझा न करें।









