मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल के कारण गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया। नल के पानी में सीवेज मिलने से बड़ी संख्या में लोग उल्टी-दस्त से बीमार पड़े। इस घटना में एक छह महीने के मासूम बच्चे की मौत हो गई, जिसे उसके माता-पिता करीब 10 साल की मन्नतों के बाद पाए थे। बच्चे को दूध में नल का पानी मिलाकर पिलाया गया था, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। प्रशासन के अनुसार अब तक 7 मौतों की पुष्टि हुई है और 1,000 से अधिक लोग बीमार हुए हैं, जिनमें कई अस्पताल में भर्ती हैं। शुरुआती जांच में पानी की पाइपलाइन में गंदा पानी मिलने की बात सामने आई है। सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं, प्रभावित क्षेत्र में साफ पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई तथा मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने की घोषणा की गई है।
इंदौर की यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं की विफलता को उजागर करती है, जहां दूषित पानी के कारण मासूम जानें गईं और सैकड़ों लोग बीमार हुए। यह हादसा साफ पेयजल की सुरक्षा, समय पर निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने की तत्काल जरूरत पर जोर देता है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।








