न्यूयॉर्क/तेहरान: क्या भविष्य के युद्ध बिना किसी धमाके, मिसाइल या गोली के लड़े जाएंगे? वेनेजुएला के एक सैनिक द्वारा किए गए हालिया दावे ने पूरी दुनिया के सुरक्षा विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को सकते में डाल दिया है। न्यूयॉर्क पोस्ट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए एक गुप्त ऑपरेशन के दौरान ‘सोनिक’ (ध्वनि) या ‘डायरेक्टेड-एनर्जी’ हथियार का इस्तेमाल किया है।
सैनिक की आपबीती: “ऐसा लगा जैसे सिर अंदर से फट रहा हो”
वेनेजुएला के उस सैनिक ने दावा किया कि जब वे सुरक्षा में तैनात थे, अचानक एक असहनीय ध्वनि तरंग का अहसास हुआ। कोई विस्फोट नहीं हुआ, लेकिन प्रभाव किसी बम से भी ज्यादा घातक था।
- शारीरिक असर: कुछ ही सेकंड में सैनिकों के सिर में भयानक दबाव बढ़ा, आंखों के सामने अंधेरा छा गया और कानों में तेज झनझनाहट होने लगी।
- गंभीर लक्षण: कई सैनिक जमीन पर गिर पड़े, उनके नाक और कान से खून बहने लगा और कई को खून की उल्टियां होने लगीं। वे हिलने-डुलने की स्थिति में भी नहीं थे।
- इलेक्ट्रॉनिक ब्लैकआउट: उसी समय इलाके के रडार और संचार उपकरण (Communication Devices) पूरी तरह ठप हो गए। ऐसा लगा जैसे किसी ‘अदृश्य शक्ति’ ने पूरे इलाके को लकवा मार दिया हो।
क्या होते हैं सोनिक और डायरेक्टेड-एनर्जी हथियार (DEW)?
ये पारंपरिक हथियारों से बिल्कुल अलग हैं। इनमें बारूद नहीं, बल्कि ऊर्जा और ध्वनि तरंगों (Sound Waves) को एक केंद्रित दिशा में छोड़ा जाता है।
यह तीन तरह से काम करते हैं:
- ऑडिबल (Audible): 150 डेसिबल तक की आवाज, जो सामान्य बातचीत से 100 गुना तेज होती है।
- इंफ्रासाउंड (Infrasound): 20 हर्ट्ज से कम की फ्रीक्वेंसी, जिसे कान नहीं सुन सकते लेकिन यह शरीर के अंगों को भीतर से हिला देती है।
- अल्ट्रासोनिक (Ultrasonic): 20 किलोहर्ट्ज से ज्यादा की फ्रीक्वेंसी, जो बिना सुनाई दिए दुश्मन को बेहोश कर सकती है।
सोनिक हथियारों की मारक क्षमता: क्यों हैं ये खतरनाक?
- बिना छुए हमला: ये हथियार दुश्मन को शारीरिक रूप से छुए बिना उसे दिशाहीन और शक्तिहीन कर देते हैं।
- रडार जाम करना: उच्च तीव्रता की ध्वनि तरंगें इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को ध्वस्त कर देती हैं, जिससे दुश्मन का डिफेंस सिस्टम अंधा हो जाता है।
- मनोवैज्ञानिक युद्ध: इसके जरिए दुश्मन के मन में अचानक डर, बेचैनी और घबराहट पैदा की जा सकती है।
- भीड़ नियंत्रण: साल 2025 में सर्बिया में दंगों को रोकने के लिए इसका सफल परीक्षण किया गया था।
दुनिया की ‘सुपरपावर’ और उनकी गुप्त ताकत
भले ही अमेरिका ने वेनेजुएला के दावों को खारिज किया हो, लेकिन दुनिया के कई शक्तिशाली देशों के पास यह तकनीक मौजूद है:
- अमेरिका: लॉन्ग रेंज एकॉस्टिक डिवाइस (LRAD) का उपयोग सेना और पुलिस दोनों कर रहे हैं।
- चीन: दक्षिण चीन सागर में घुसपैठियों को भगाने के लिए इसका इस्तेमाल करता है।
- रूस: ‘हवाना सिंड्रोम’ जैसी घटनाओं के पीछे रूस के संदिग्ध इंफ्रासाउंड हथियारों का नाम आता रहा है।
- इजरायल: प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए ‘स्कंक’ और एकॉस्टिक हथियारों का उपयोग करता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि ये दावे सच हैं, तो दुनिया एक ऐसे युग में प्रवेश कर चुकी है जहां किसी की नसों और दिमाग को दूर बैठे ही निशाना बनाया जा सकता है। इसे ‘अदृश्य हत्यारा’ कहना गलत नहीं होगा। मानवाधिकार संगठनों ने इन हथियारों के इस्तेमाल को ‘अमानवीय’ करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय नियमों की मांग की है।








