नई दिल्ली: राज्यसभा में मंगलवार को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने के अवसर पर चर्चा का दौर काफी सियासी टकराव में बदल गया। चर्चा की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। उन्होंने सदन में कहा कि वंदे मातरम् का महत्व समझने वाले लोग इसे राजनीतिक एजेंडे से नहीं जोड़ते, जबकि कुछ लोग इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस दौरान कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला।
अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “जो लोग इसे चुनावी हथकंडा मान रहे हैं, उन्हें इसे समझने की जरूरत है। यह गीत युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए समर्पण, भक्ति और देशभक्ति का संदेश है।”
वहीं, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने गृह मंत्री के बयान का पलटवार किया। उन्होंने कहा कि “जो लोग कल तक वंदे मातरम् नहीं गाते थे, आज वही इसे राष्ट्रीय गौरव के तौर पर पेश कर रहे हैं। इस दौरान खरगे ने राज्यसभा में वंदे मातरम् के नारे भी लगाए।”
खरगे ने कांग्रेस और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को भी नमन किया। उन्होंने कहा, “मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे इस महान गीत को गाने का अवसर मिला। कांग्रेस की तरफ से बंकिमजी को नमन। मैं पिछले 60 साल से यह गा रहा हूं।”
खरगे ने सत्ता पक्ष पर ध्यान भटकाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि देश आर्थिक संकट और बेरोजगारी से जूझ रहा है, ऐसे में सरकार बंगाल चुनाव के मद्देनजर वंदे मातरम् पर चर्चा कर असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है। उन्होंने कहा, “आज एक डॉलर की कीमत 90 रुपये हो चुकी है। जनता की समस्याओं पर चर्चा होनी चाहिए, न कि इस तरह के बहाने बनाकर ध्यान भटकाया जाए।”
इसके अलावा, खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 1937 में नेहरू पर वंदे मातरम् की कुछ लाइनें हटाने का आरोप लगाया था। “लेकिन जब आप मुस्लिम लीग के साथ मिलकर बंगाल में सरकार बना रहे थे, तब आपकी देशभक्ति कहां थी?” उन्होंने चीन और बांग्लादेश को लेकर भी चिंता जताई।
संसद में हुई यह बहस दर्शाती है कि वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रीय गीत भी आज राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील मुद्दा बन चुके हैं। चर्चा के दौरान सदन में तीखी बहस और विपक्ष-सत्ता के बीच टकराव देखने को मिला।








