नई दिल्ली: मंगलवार सुबह राज्यसभा में 11 बजे से विशेष कार्यवाही के दौरान राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर चर्चा शुरू हुई। इस चर्चा की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। चर्चा का उद्देश्य देश के किशोर, युवा और आने वाली पीढ़ियों को वंदे मातरम् के महत्व और योगदान से अवगत कराना बताया गया।
अमित शाह ने कहा, “हम सब सौभाग्यशाली हैं कि हमें इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने और इसमें हिस्सा लेने का अवसर मिला है। यह महान गीत मां भारती के प्रति समर्पण, भक्ति और कर्तव्य का भाव जगाने वाला है। जो लोग समझ नहीं पा रहे कि वंदे मातरम् पर चर्चा क्यों हो रही है, उन्हें अपनी समझ को नए सिरे से देखना चाहिए।”
उन्होंने बताया कि सोमवार को लोकसभा में कुछ सदस्यों ने इस चर्चा को राजनीतिक मुद्दा या ध्यान भटकाने वाला हथकंडा बताने का प्रयास किया। अमित शाह ने कहा, “हम मुद्दों पर चर्चा करने से नहीं डरते, संसद का बहिष्कार नहीं करते और हमारे पास कोई छिपाने वाली बात नहीं है। किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए हम तैयार हैं।”
अमित शाह ने वंदे मातरम् की उत्पत्ति और महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 7 नवंबर, 1875 को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत पहली बार सार्वजनिक हुआ। आरंभ में इसे साहित्यिक कृति माना गया, लेकिन जल्द ही यह देशभक्ति, त्याग और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन गया।
उन्होंने कहा, “वंदे मातरम् केवल बंगाल या भारत तक सीमित नहीं रहा। दुनिया भर में आजादी के दीवाने इस गीत का गुणगान करते रहे। यह गीत शहीदों और जवानों के हृदय में भी हमेशा जीवित रहा है। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणास्रोत रहा और राष्ट्र को अपनी दिव्य शक्ति की याद दिलाता रहा।”
गृहमंत्री ने वंदे मातरम् को भारत के पुनर्जन्म का मंत्र बताते हुए महर्षि अरविन्द के विचारों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “यह गीत मां भारती को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करने का नारा था, आजादी के उद्घोष का प्रतीक और शहीदों के लिए बलिदान की प्रेरणा रहा।”
अमित शाह ने सदन में कहा कि वंदे मातरम् के प्रति समर्पण की जरूरत आज भी उतनी ही है जितनी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह गीत आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति और कर्तव्य के मूल्य का प्रतीक है।
सदन में यह चर्चा इस अवसर पर हुई जब वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने का ऐतिहासिक जश्न मनाया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री ने सदन में सभी सांसदों को इस राष्ट्रीय गीत के महत्व को समझने और देशभक्ति की भावना को बढ़ाने का अवसर दिया।










