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अग्रवाल समाज ने गढ़ी थी छत्तीसगढ़ महतारी की पहली प्रतिमा, आज उसी समाज पर हो रहा विवाद; उलझा हुआ इतिहास सामने आया

रायपुर। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रमुख अमित बघेल द्वारा सिंधी और अग्रवाल समाज पर की गई विवादित टिप्पणी के बाद पूरे प्रदेश में बवाल मचा हुआ है। इसी बीच एक दिलचस्प व ऐतिहासिक तथ्य सामने आया है। छत्तीसगढ़ महतारी की पहली प्रतिमा स्थापित करने वाला कोई और नहीं, बल्कि अग्रवाल समाज का ही एक व्यक्ति था।

दुर्ग के वर्तमान SP विजय अग्रवाल के पिता दाऊ आनंद कुमार अग्रवाल ने 1998 के राज्य आंदोलन के चरम दौर में रायपुर के घड़ी चौक पर पहली बार छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा स्थापित करवाई थी। आज यही प्रतिमा मंदिर के रूप में स्थापित है, जिसकी देखरेख वर्तमान में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के कार्यकर्ता ही कर रहे हैं। यानी विडंबना यह है कि जिस संगठन के प्रमुख ने एक पूरे समाज पर टिप्पणी कर विवाद खड़ा कर दिया, उसी समाज के दाऊ आनंद अग्रवाल ने वह नींव रखी थी, जिसे आज वही संगठन संजो रहा है।

1998 के दौर में राज्य निर्माण आंदोलन अपनी चरम गति पर था। रायपुर का कलेक्टोरेट, घड़ी चौक और अन्य प्रमुख स्थान रोज़ाना धरना-प्रदर्शनों से भरे होते थे। इसी अखंड धरना स्थल पर बैठने वाले आंदोलनकारी दाऊ आनंद अग्रवाल ने आंदोलन को एक भावनात्मक प्रतीक देने के लिए महतारी की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया। इतिहासकार रामेन्द्रनाथ मिश्र बताते हैं कि घड़ी चौक राज्य आंदोलन का सबसे बड़ा केंद्र था। महतारी की प्रतिमा वहां लगना आंदोलन में ऊर्जा, पहचान और एकता का प्रतीक बन गया।

छत्तीसगढ़ महतारी का पहला चित्र 1992 में रायपुर के ललित मिश्रा ने बनाया था। वे उस समय छात्र नेता और राज्य आंदोलन में सक्रिय थे।
उन्होंने माता लक्ष्मी, दुर्गा और सरस्वती की तस्वीरों को आधार बनाकर पाँच दिन की मेहनत से छत्तीसगढ़ महतारी की पहली छवि तैयार की थी।
बाद में इसी छवि के आधार पर प्रतिमा घड़ी चौक पर स्थापित की गई।

महंत रामसुंदर दास के अनुसार, पहली Mahatari प्रतिमा चार भुजाओं वाली थी, एक हाथ आशीर्वाद की मुद्रा, दूसरे हाथ में हंसिया और धान की बालियाँ जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और कृषि जीवन का प्रतीक था।

राज्य निर्माण के बाद वर्षों तक घड़ी चौक की यह ऐतिहासिक प्रतिमा उपेक्षित होती रही। 2021 में महतारी सेवा रायपुर की एक टीम और कुछ युवाओं ने इसकी देखरेख अपने हाथों में ली। उनकी मांग है कि छत्तीसगढ़ महतारी का भव्य मंदिर बनाया जाए, जिसमें सभी समाजों की सहभागिता हो।

अमित बघेल की बयानबाजी के बाद अब यह तथ्य सामने आने से नई बहस शुरू हो गई है कि छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन की विरासत किसी एक समाज की नहीं थी, बल्कि सभी समाजों की साझी लड़ाई का परिणाम थी। महतारी की पहली प्रतिमा स्थापित करने में अग्रवाल समाज की प्रमुख भूमिका अब इतिहास के दस्तावेज़ों के साथ फिर सुर्खियों में है।

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