बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में 21 साल पुराने डकैती मामले में सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा और प्रस्तुत साक्ष्य भरोसेमंद नहीं थे।
यह मामला दिसंबर 2003 का है, जब कोरिया जिला के पटना थाना क्षेत्र में करीब 10 लोगों ने एक घर में घुसकर परिवार के सदस्यों से मारपीट की और नकदी व सोने-चांदी के जेवरात लूट लिए थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ डकैती व घर में घुसने की धाराओं में केस चलाया गया।
ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में धारा 457 और 395 के तहत आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी। हालांकि, आरोपियों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पहचान परेड (TIP) की प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। गवाहों ने आरोपियों को पहले ही थाने में देख लिया था, जिससे पहचान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए। कोर्ट ने यह भी कहा कि लंबे समय बाद कराई गई पहचान परेड का साक्ष्य के रूप में महत्व कमजोर हो जाता है।
इसके अलावा, जब्त किए गए सामान को लेकर भी कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ। जब्ती गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाए गए और यह स्पष्ट नहीं हो सका कि सामान कहां से और कैसे बरामद किया गया।
इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को त्रुटिपूर्ण करार देते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। साथ ही जिन आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, उनके मामलों में अपील स्वतः समाप्त मानी गई।








