सोने की खरीदारी इमोशन से जुड़ा होता है. भारत में लोग खासकर शादी और त्योहारों के दौरान सोने की ज्वेलरी खरीदते हैं. लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अगले एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की है.
वैसे पिछले 12 वर्षों में पीएम मोदी ने जब-जब देशवासियों से कोई अपील की है, उसका लोगों ने पालन किया है, चाहे रसोई गैस की सब्सिडी छोड़ने की अपील हो या फिर कोविड के दौरान नियमों को पालन करना हो.
इस बीच अब पीएम मोदी ने एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की है, पीएम मोदी ने ये अपील रविवार को की, और सोमवार को इसका असर सर्राफा बाजार मिला-जुला दिख रहा है. पीएम की अपील के बाद सोमवार को बाजार खुलते ही सोने की मांग में सुस्ती नजर आई, लेकिन इसके उलट चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई.
क्यों की गई यह अपील?
दरअसल, जानकारों की मानें तो पीएम मोदी की भावुक अपील के पीछे मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक संकट और भारत का बढ़ता करेंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) है. क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार निकल गई हैं, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार दबाव में है. ऐसे में देश के लोग फिलहाल सोना नहीं खरीदकर अर्थव्यवस्था और रुपये को मजबूती दे सकते हैं.
चांदी में दिखी चमक
सोमवार को बाजार खुलने के साथ ही निवेशकों और आम ग्राहकों का रुख बदला हुआ दिखा. जहां सोने के शोरूम्स में फुटफॉल कम रहा, वहीं कमोडिटी मार्केट में चांदी के प्रति आकर्षण बढ़ गया. चांदी की कीमतें सोमवार सुबह 2,200 प्रति किलोग्राम तक बढ़ गईं. ट्रेडिंग के दौरान चांदी की कीमत बढ़कर 2,64,922 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई. जबकि गोल्ड की कीमतें एक दायरे में बनी हुई हैं.
पीएम मोदी के फैसले से दुकानदार हैरान
पीएम मोदी की अपील के बाद मुंबई के मशहूर ज़वेरी बाजार में ‘आजतक’ की टीम ने कारोबारियों और ग्राहकों से बातचीत की. ज्वेलरी दुकानदार कुमार जैन का कहना है कि सोने के दामों में पिछले कुछ दशकों में भारी उछाल आया है. भाव बढ़कर प्रति 10 ग्राम डेढ़ लाख रुपये के पार पहुंच चुका है.
दुकानदार का कहना है कि पूरे देश में करीब 3 करोड़ से ज्यादा लोग सर्राफा व्यापार से जुड़े हुए हैं. अब यह सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की रोजी-रोटी का जरिया भी है. हालांकि उन्होंने लोगों से यह भी अपील की कि निवेश के उद्देश्य से ज्यादा सोना खरीदने से बचें और केवल जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें.
एक और दुकानदार टीटी कुमार जैन ने कहा कि हम ग्राहकों से यही कहना चाहते हैं कि निवेश के लिए ज्यादा सोना न खरीदें, जरूरत जितनी हो उतना ही खरीदें. वहीं ज्वेलरी खरीदने आई ग्राहक सयाली का कहना है कि भारतीय परंपरा में सोने का विशेष महत्व है और इसे शुभ माना जाता है. हमारे यहां शादी-ब्याह हो या त्योहार, लोग सोना जरूर खरीदते हैं. इसलिए जरूरत के हिसाब से खरीदारी करना भी जरूरी होता है.
वैसे भी पिछले 2-3 वर्षों में सोना-चांदी ने जमकर रिटर्न दिए हैं, जिससे पिछले कुछ महीनों से सोने-चांदी को लेकर लोगों में क्रेज बढ़ा है. पिछले एक साल में चांदी की कीमत करीब दोगुनी हो गई है, जबकि सोने 60 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है. ऐसे में लोग सोने-चांदी को निवेश का बेहतर विकल्प मान रहे हैं.
हालांकि चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह केवल ज्वेलरी डिमांड में इजाफा नहीं है, बल्कि औद्योगिक डिमांड भी बढ़ी है. जानकारों की मानें तो सोने का आयात कम होने से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले स्थिर हो सकता है.
पीएम मोदी की अपील का असली मायने
बता दें, भारत हर साल करीब 750 टन सोना आयात करता है. अगर यह मांग 50% भी कम होती है, तो अरबों डॉलर की विदेशी करेंसी बच सकती है. हालांकि पीएम मोदी की अपील के बाद लोग अब ‘फिजिकल गोल्ड’ के बजाय सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और चांदी में निवेश बढ़ा सकते हैं.
अगर पीएम मोदी की इस अपील को लोगों ने गंभीरता से लिया तो इकोनॉमी पर इसका सकारात्मक असर दिखने को मिल सकता है. खासकर मध्यम वर्ग और उच्च वर्ग ने पीएम मोदी की सलाह मान ली तो आने वाले महीनों में सोने के आयात बिल में भारी गिरावट आएगी. हालांकि चांदी की बढ़ती कीमतों ने ज्वेलर्स के लिए नई चिंताएं पैदा कर दी हैं, क्योंकि अब चांदी के गहनों और बर्तनों की मांग में अचानक उछाल आने की संभावना है.
एक्सपर्ट्स की मानें तो चांदी की कीमतों में आई तेजी यह दर्शाती है कि भारतीय बाजार वैकल्पिक निवेश की तलाश में है. अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो भारत अपने विदेशी मुद्रा भंडार को तेल संकट के बावजूद सुरक्षित रखने में सफल हो सकता है.










