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छत्तीसगढ़ के 85 हजार शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य; सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विभाग ने शुरू की तैयारी, नहीं दी तो मिलेगी अनिवार्य सेवानिवृत्ति

रायपुर। छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग और कार्यरत शिक्षकों के लिए एक बहुत बड़ी खबर है। प्रदेश के लगभग 85 हजार शिक्षकों को अब अपनी वेतनवृद्धि (Increment) या पदोन्नति (Promotion) के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद सभी कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) अनिवार्य कर दिया गया है।

इस बीच एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव भी किया गया है। अब तक छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) द्वारा आयोजित होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा का जिम्मा अब कर्मचारी चयन बोर्ड संभालेगा। हालांकि, वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों के लिए यह परीक्षा विभागीय स्तर पर आयोजित करने की तैयारी चल रही है।


सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई को दिए अपने निर्णय में राज्यों को समय-समय पर टेट परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने शिक्षकों को राहत और शर्तें दोनों दी हैं:

  • समय-सीमा में वृद्धि: परीक्षा पास करने की अंतिम तिथि को 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर अब 31 अगस्त 2028 कर दिया गया है।
  • किन्हें मिलेगी छूट?: जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति (Retirement) में 5 वर्ष या उससे कम का समय बचा है, उन्हें इस परीक्षा से छूट रहेगी।
  • कड़ा प्रावधान: जिन शिक्षकों की नौकरी 5 वर्ष से अधिक बची है, उन्हें हर हाल में टीईटी पास करना होगा। ऐसा न करने पर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दी जा सकती है।

इससे पहले लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने 13 मार्च 2026 को सभी संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) से उन शिक्षकों की सूची मांगी थी जो टेट उत्तीर्ण नहीं हैं। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में ऐसे अपात्र शिक्षकों की संख्या लगभग 85 हजार है।


इस बड़े फैसले के बाद छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष संजय शर्मा ने शासन को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, ताकि शिक्षकों को परेशानी न हो:

  • जुलाई में परीक्षा: एसोसिएशन ने आग्रह किया है कि जुलाई माह में ही विभागीय स्तर पर सीमित शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की जाए, जिससे कोर्ट की जटिलताएं दूर हो सकें।
  • साल में दो बार परीक्षा: हर 6 महीने के अंतराल में वर्ष में दो बार परीक्षा का आयोजन हो ताकि सबको मौका मिल सके।
  • ऑफलाइन परीक्षा और नजदीक केंद्र: परीक्षा पूरी तरह ऑफलाइन (Pen-Paper) मोड में होनी चाहिए। शिक्षकों की सुविधा के लिए प्रत्येक विकासखंड की 5 से 7 बड़ी शालाओं या संकुलों को परीक्षा केंद्र बनाया जाए।
  • न्यूनतम उत्तीर्णांक: चूंकि यह सेवाकालीन (In-service) शिक्षकों के लिए है, इसलिए इसमें केवल एक न्यूनतम उत्तीर्णांक (Passing Marks) तय किया जाना चाहिए।

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