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रिसाली निगम के पार्षद विनय नेताम बर्खास्त; तोड़फोड़ और कमिश्नर को बंधक बनाने के आरोप में संभागायुक्त की बड़ी कार्रवाई

भिलाई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग संभाग से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। नगर पालिक निगम रिसाली के वार्ड क्रमांक-16 (बीआरपी कालोनी) के पार्षद विनय नेताम को संभागायुक्त ने पद से बर्खास्त कर दिया है। संभागायुक्त एसएन राठौर ने रिसाली निगम आयुक्त द्वारा प्रस्तुत विस्तृत जांच प्रतिवेदन और आवेदन के आधार पर यह कड़ा फैसला लिया है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1996 की धारा 19(1)(अ) के तहत की गई है।


क्या है पूरा मामला और आरोप?

प्रकरण के अनुसार, यह मामला मार्च 2024 का है, जिसकी जांच रिपोर्ट 19 मार्च 2026 को निगम आयुक्त द्वारा प्रस्तुत की गई थी। जांच में पार्षद विनय नेताम पर अपने पदीय दायित्वों के विपरीत जाकर शासकीय कार्यों में गंभीर बाधा उत्पन्न करने के आरोप पूरी तरह प्रमाणित पाए गए।

पार्षद पर मुख्य रूप से निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुए हैं:

  • शासकीय संपत्ति को नुकसान: पार्षद ने रिसाली निगम मुख्यालय परिसर में स्थित केंद्र के कक्ष में जबरन प्रवेश किया। वहां जमकर तोड़फोड़ की और कंप्यूटर, प्रिंटर व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भारी नुकसान पहुंचाया।
  • अधिकारियों को बनाया बंधक: आरोप है कि उन्होंने कार्यालयीन समय के दौरान निगम आयुक्त (कमिश्नर) समेत अन्य अधिकारियों के कक्षों के दरवाजे बाहर से बंद कर दिए, जिससे अधिकारी भीतर ही बंधक जैसी स्थिति में आ गए।
  • आम जनता को रोका: इस हंगामे के दौरान उन्होंने नगर निगम पहुंचे आम नागरिकों को भी अधिकारियों से मिलने और अपनी समस्याएं बताने से रोका।

थाने में दर्ज है एफआईआर

इस मामले को लेकर नेवई थाने में शिकायतकर्ता अमरदीप कुमार साव ने प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि पार्षद विनय नेताम ने केंद्र में आकर न केवल उपकरणों को क्षति पहुंचाई, बल्कि वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी भी दी थी। पुलिस ने इस मामले में विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया था।


संभागायुक्त का फैसला: पद पर बने रहना जनहित के विरुद्ध

सुनवाई के दौरान संभागायुक्त ने दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, बयानों और विधिक दस्तावेजों का गहन अध्ययन किया। सभी तथ्यों की समीक्षा के बाद संभागायुक्त एसएन राठौर इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि पार्षद का ऐसा आचरण सार्वजनिक हित, जनहित और प्रशासनिक व्यवस्था के बिल्कुल विपरीत है। ऐसे व्यक्ति को पार्षद पद पर बनाए रखना कानूनन और नैतिक रूप से अनुचित है, जिसके बाद उन्हें पद से हटाने का अंतिम आदेश जारी कर दिया गया।

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