रायपुर। छत्तीसगढ़ में चिलचिलाती धूप और उमस ने एक बार फिर अपने कड़े तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मौसम विभाग (IMD) की ताजा चेतावनी के मुताबिक, अगले दो दिनों के भीतर प्रदेश के अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। तापमान बढ़ने के कारण लोगों को आने वाले दिनों में भारी उमस और थपेड़े मारने वाली गर्म हवाओं (लू) का सामना करना पड़ेगा।
राजनांदगांव में पारा 41 डिग्री पार, राजधानी रायपुर भी तपी
बीते 24 घंटों में प्रदेश का सबसे गर्म इलाका राजनांदगांव रहा, जहां पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। राज्य के प्रमुख शहरों और जिलों के तापमान का हाल कुछ इस तरह रहा:
- राजनांदगांव: 41.0°C (सबसे गर्म)
- बालोद: 40.6°C
- बिलासपुर: 40.3°C
- रायपुर: 40.0°C
- सक्ती: 39.1°C
मैदानी और मध्य छत्तीसगढ़ के इलाकों में दोपहर के वक्त सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा है और लोग तेज धूप से बचने के इंतजामों में जुट गए हैं।
सरगुजा और बस्तर संभाग को राहत, मौसम सुहावना
एक तरफ जहां मैदानी इलाके भीषण गर्मी की चपेट में हैं, वहीं दूसरी तरफ उत्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ के लोगों को बड़ी राहत मिली हुई है। सरगुजा और बस्तर संभाग के जिलों में मौसम अपेक्षाकृत काफी सुहावना बना हुआ है।
- जगदलपुर (बस्तर): अधिकतम तापमान 35.6°C रिकॉर्ड किया गया।
- अंबिकापुर (सरगुजा): अधिकतम तापमान 35.5°C दर्ज हुआ।
अगले 5 दिन राहत के संकेत: गरज-चमक के साथ बारिश के आसार
मौसम वैज्ञानिकों ने चिलचिलाती गर्मी के बीच एक राहत भरी खबर भी दी है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले पांच दिनों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज अचानक बदल सकता है। कुछ जिलों में स्थानीय प्रभाव के चलते गरज-चमक के साथ हल्की बारिश (Pre-Monsoon Activity) होने की संभावना जताई गई है। अगर ऐसा होता है, तो लोगों को इस भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिल सकती है।
मौसम विभाग की जरूरी सलाह: दोपहर में निकलने से बचें
बढ़ती गर्मी और उमस को देखते हुए मौसम विशेषज्ञों ने आम जनता और किसानों के लिए जरूरी गाइडलाइन जारी की है:
- आम जनता के लिए: दोपहर के समय (विशेषकर 12 से 4 बजे के बीच) बिना किसी जरूरी काम के घर या दफ्तर से बाहर न निकलें। शरीर में पानी की कमी न होने दें, लगातार पानी, छाछ या नींबू पानी पीते रहें। बाहर निकलते समय सूती कपड़े से चेहरा और सिर जरूर ढकें।
- किसानों के लिए: मौसम विभाग ने अन्नदाताओं को सलाह दी है कि वे अगले 5 दिनों के बारिश के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर ही अपनी फसलों की कटाई, मड़ाई या अन्य कृषि कार्यों की योजना बनाएं, ताकि फसलों को नुकसान न हो।










