रायपुर। राजधानी रायपुर में लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक के दबाव और अनियंत्रित पब्लिक ट्रांसपोर्ट को पटरी पर लाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। शहर में यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए अब इंदौर और मुंबई का सफल मॉडल लागू किया जा रहा है। इसके तहत रायपुर के करीब 30 हजार ऑटो और ई-रिक्शा को डिजिटल रजिस्ट्रेशन के जरिए 4 अलग-अलग जोनों में बांटा जाएगा।
यातायात विभाग और आरटीओ द्वारा इसके लिए 5 जुलाई 2026 तक एक विशेष पंजीकरण अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, अब तक केवल 7,500 वाहनों का ही रजिस्ट्रेशन हो सका है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि समय-सीमा खत्म होने के बाद बिना डिजिटल पंजीयन के किसी भी ऑटो या ई-रिक्शा को सड़क पर उतरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
रंग तय करेंगे रूट, क्यूआर कोड से होगी पहचान
इस नई व्यवस्था के तहत पूरे शहर को चार प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया जा रहा है। हर जोन के वाहनों को एक विशेष रंग (कलर कार्ड) और क्यूआर कोड (QR Code) जारी किया जाएगा।
जोन का निर्धारण: रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, शंकर नगर और टैगोर नगर जैसे क्षेत्रों को अलग-अलग रंगों के आधार पर कार्ड बांटे जाएंगे।
कॉमन जोन: स्कूल और कॉलेज जाने वाले वाहनों के लिए एक अलग ‘कॉमन जोन’ निर्धारित रहेगा, ताकि छात्रों को परेशानी न हो।
डिजिटल ट्रैकिंग: हर वाहन पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करते ही पुलिस को चालक का नाम, मोबाइल नंबर और उसके तय रूट की पूरी जानकारी मिल जाएगी।
अंदरूनी कॉलोनियों तक मिलेगी सवारी, मुख्य मार्गों को जाम से मुक्ति
वर्तमान में शहर के अधिकांश ऑटो और ई-रिक्शा चालक रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मुख्य बाजारों जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में ही चक्कर काटते हैं। इससे मुख्य सड़कों पर वाहनों का मेला लग जाता है और भारी जाम की स्थिति बनती है। वहीं दूसरी ओर, शहर की अंदरूनी और रिहायशी कॉलोनियों के नागरिकों को ऑटो के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
प्रशासन का दावा है कि नई जोन व्यवस्था लागू होने से वाहनों का समान वितरण होगा। चालकों को अपने तय जोन की अंदरूनी कॉलोनियों में भी सेवाएं देनी होंगी, जिससे उन इलाकों तक भी सुगम पब्लिक ट्रांसपोर्ट पहुंच सकेगा जहां अब तक इसकी कमी थी।
परमिट फ्री ई-रिक्शा भी अब रडार पर
सरकारी नियमों के तहत ई-रिक्शा को परमिट से छूट मिली हुई है, लेकिन इसी छूट की आड़ में राजधानी की सड़कों पर बिना किसी नियंत्रण के हजारों ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। अब ट्रैफिक पुलिस स्थानीय स्तर पर इनका पूरा डिजिटल डेटाबेस तैयार कर रही है। इससे बिना नंबर, बिना वैध दस्तावेजों के चलने वाले और ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले ई-रिक्शा चालकों की पहचान बेहद आसान हो जाएगी।
यात्री सुरक्षा और अपराध नियंत्रण में मिलेगी मदद
यातायात विभाग के आला अधिकारियों के मुताबिक, इस डिजिटल मानिटरिंग का सबसे बड़ा फायदा यात्रियों की सुरक्षा और अपराध नियंत्रण में होगा। यदि कोई चालक नियमों का उल्लंघन करता है या किसी अप्रिय घटना में शामिल होता है, तो उसके डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए उसे तुरंत ट्रेस किया जा सकेगा। विभाग ने सभी ऑटो और ई-रिक्शा चालकों से अपील की है कि वे 5 जुलाई से पहले हर हाल में अपना दस्तावेज अपडेट कराकर डिजिटल आईडी और क्यूआर कोड प्राप्त कर लें, अन्यथा सख्त दंडात्मक कार्रवाई के लिए तैयार रहें।










