रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और लम्बे इंतज़ार के बाद आज यानि 16 जून से सभी सरकारी और निजी स्कूल दोबारा खुल गए हैं। नए शैक्षणिक सत्र के पहले ही दिन भर के विद्यालयों में ‘शाला प्रवेश उत्सव 2026’ का भव्य आयोजन किया गया, जहां स्कूल पहुंचे छात्र-छात्राओं का अनोखे और पारम्परिक अंदाज़ में स्वागत किया गया।
ढोल-नंगाड़े, तिलक और मिठाई से सजे स्कूल
सुबह से ही स्कूलों में एक अलग ही रौनक देखने को मिली। शक्षकों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर रंगोली सजाकर बच्चों का स्वागत किया। पहली बार स्कूल की चौखट पर कदम रखने वाले कक्षा पहली के बच्चों के लिए यह दिन बेहद खास रहा। शिक्षकों ने बच्चों को तिलक लगाया, फूल-माला पहनाई और मुंह मीठा कराकर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। कई जगहों पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और शाला विकास समिति के सदस्य भी बच्चों का हौसला बढ़ाने पहुंचे।
सीएम विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं, जनआंदोलन बनाने की अपील
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के सभी विद्यार्थियों, पालकों और शिक्षकों को नए सत्र की बधाई दी है। मुख़्यमंत्री ने सभी मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को पत्र लिखकर इस अभियान में शामिल होने का आह्वान किया है ताकि ‘शाला प्रवेश उत्सव’ को एक जनआंदोलन का स्वरुप दिया जा सके और राज्य का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
शून्य ड्रॉप-आउट और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर
स्कूल शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस बार प्रवेश उत्सव के दौरान ‘शून्य ड्रॉप-आउट’ रखा गया है। इसके तहत जो बच्चे बिच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं, उन्हें दोबारा ढूंढकर स्कूल लाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही आंगनबाड़ी के बच्चों को सीधे पहली कक्षा में और पांचवी पास कर चुके बच्चों को छठवीं कक्षा में दाखिला दिलाया जा रहा है।
पहले ही दिन बच्चों को नई किताबें और यूनिफॉर्म बांटे गए, जिससे बच्चों के चेहरों पर एक अलग ही मुस्कान तैर गयी। स्कूलों को नया रूप देने के लिए दीवारों पर सुन्दर और ज्ञानवर्धक चित्र भी बनाये गए हैं। लम्बे समय बाद अपने दोस्तों और शिक्षकों से मिलकर बच्चे बेहद उत्साहित नज़र आये और स्कूलों का माहौल एक बार फिर खिलखिलाहट से गूंज उठा।










