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शिक्षा सत्र के पहले दिन दो तस्वीरें: दुर्ग में प्रार्थना सभा में छात्र बेहोश, बालोद में शिक्षक की मांग को लेकर धरना

रायपुर। नए शिक्षा सत्र के पहले ही दिन छत्तीसगढ़ के दो जिलों से शिक्षा व्यवस्था की अलग-अलग तस्वीरें सामने आईं। एक ओर दुर्ग में प्रार्थना सभा के दौरान गर्मी और उमस के कारण एक छात्र बेहोश होकर गिर पड़ा, वहीं दूसरी ओर बालोद जिले में शिक्षक की कमी से नाराज बच्चों और अभिभावकों ने स्कूल के बाहर धरना देकर विरोध प्रदर्शन किया। दोनों मामलों में प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा।

प्रार्थना सभा के दौरान बिगड़ी छात्र की तबीयत

दुर्ग स्थित जेआरडी स्कूल में सोमवार सुबह प्रार्थना सभा के दौरान एक छात्र अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा। बताया जा रहा है कि अत्यधिक गर्मी और उमस के कारण उसकी तबीयत खराब हो गई।

घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने तत्काल छात्र को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है। सूचना मिलने पर जिला शिक्षा अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे और छात्र के स्वास्थ्य की जानकारी ली। चिकित्सकों के अनुसार छात्र की हालत फिलहाल स्थिर है।

बालोद में स्कूल के बाहर धरने पर बैठे बच्चे और अभिभावक

वहीं डौंडी विकासखंड के शासकीय प्राथमिक विद्यालय कांडे में शाला प्रवेश उत्सव के दिन ही स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगा मिला। शिक्षक की कमी से नाराज छात्र और उनके परिजन स्कूल के बाहर पंडाल लगाकर धरने पर बैठ गए।

ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में 99 बच्चों की पढ़ाई केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित की जा रही थी। लंबे समय से अतिरिक्त शिक्षक की मांग किए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिसके चलते ग्रामीणों ने नए सत्र के पहले दिन ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

प्रशासन के आश्वासन पर खत्म हुआ आंदोलन

मामले की जानकारी मिलने के बाद तहसीलदार, पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों और अभिभावकों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं।

काफी देर तक चली बातचीत के बाद स्कूल में संगवारी शिक्षक की व्यवस्था करने पर सहमति बनी। प्रशासन के आश्वासन के बाद बच्चों और परिजनों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

नए शिक्षा सत्र के पहले ही दिन सामने आई इन दोनों घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर भीषण गर्मी के बीच स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। प्रशासन ने दोनों मामलों में आवश्यक कार्रवाई और सुधार के आश्वासन दिए हैं।

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