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छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट सुरक्षा के लिए सख्त नियम लागू

रायपुर, 20 जून। बहुमंजिला इमारतों में बढ़ती लिफ्ट दुर्घटनाओं की आशंकाओं को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने लिफ्ट सुरक्षा और संचालन को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्य के सभी नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों को इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।

सरकार के अनुसार, नए प्रावधानों का उद्देश्य लिफ्ट संचालन में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना और दुर्घटनाओं की संभावनाओं को कम करना है। नवा रायपुर मंत्रालय से जारी आदेश में कहा गया है कि दिशा-निर्देश राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC), भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानकों तथा अन्य लागू नियमों के अनुरूप तैयार किए गए हैं।

आग लगने पर लिफ्ट का उपयोग नहीं करने की सलाह

नई गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि आग लगने की स्थिति में लिफ्ट का उपयोग नहीं किया जाए और केवल सीढ़ियों का इस्तेमाल किया जाए। इसके लिए भवनों में चेतावनी संकेतक लगाने और निवासियों को समय-समय पर जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आग के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने या लिफ्ट शाफ्ट में धुआं भरने से गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

लिफ्ट स्थापना से पहले मंजूरी और सुरक्षा परीक्षण अनिवार्य

अब किसी भी बहुमंजिला भवन में लिफ्ट लगाने से पहले आवश्यक अनुमोदन, पंजीयन और सुरक्षा परीक्षण कराना अनिवार्य होगा। लिफ्ट संचालन शुरू करने से पहले तकनीकी जांच और थर्ड पार्टी निरीक्षण भी कराना होगा, ताकि सभी सुरक्षा उपकरण और आपातकालीन व्यवस्थाएं पूरी तरह कार्यशील हों।

फायर रेटेड शाफ्ट और बैकअप बिजली की व्यवस्था जरूरी

सरकार ने निर्देश दिया है कि लिफ्ट शाफ्ट अग्निरोधी मानकों के अनुरूप बनाए जाएं। साथ ही लिफ्ट के लिए अलग विद्युत आपूर्ति और आपातकालीन बिजली बैकअप की व्यवस्था अनिवार्य होगी। आधुनिक सुरक्षा मानकों के तहत ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस (ARD) लगाने पर भी जोर दिया गया है, जिससे बिजली जाने पर लिफ्ट निकटतम मंजिल पर पहुंचकर स्वतः दरवाजा खोल सके।

साप्ताहिक से वार्षिक निरीक्षण तक होगी निगरानी

लिफ्ट सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए साप्ताहिक, मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक निरीक्षण की व्यवस्था निर्धारित की गई है। रखरखाव और निरीक्षण से जुड़े सभी रिकॉर्ड कम से कम पांच वर्ष तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। इससे दुर्घटना या शिकायत की स्थिति में जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।

दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएं अनिवार्य

नई गाइडलाइन में दिव्यांगजनों की सुविधा को भी प्राथमिकता दी गई है। लिफ्ट में बेल संकेतक, ऑडियो फ्लोर अनाउंसमेंट और दृश्य मंजिल संकेतक जैसी सुविधाओं को अनिवार्य प्रावधानों में शामिल किया गया है, ताकि सभी वर्गों के लोगों को सुरक्षित और सुगम पहुंच मिल सके।

नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने पर संबंधित लिफ्ट का संचालन रोका जा सकता है या उसे सीलबंद किया जा सकता है। किसी दुर्घटना, चोट या जनहानि की स्थिति में भवन स्वामी, प्रबंधन समिति और रखरखाव एजेंसी की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

बढ़ती बहुमंजिला इमारतों के बीच अहम कदम

रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, कोरबा समेत राज्य के कई शहरों में बहुमंजिला आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में लिफ्ट सुरक्षा को लेकर जारी ये दिशा-निर्देश शहरी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थानीय निकाय और भवन प्रबंधन समितियां इन नियमों का सख्ती से पालन कराएं, तो लिफ्ट से जुड़े अधिकांश हादसों को रोका जा सकता है।

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