रायपुर। मुख्यमंत्री निवास में गुरुवार देर रात तक चली अहम बैठक में मंत्रियों के कामकाज और जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार बैठक में मंत्रियों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि जनता के बीच किसी भी प्रकार का असंतोष नहीं दिखना चाहिए और जनहित से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
जानकारी के मुताबिक मंत्रियों से कहा गया कि वे अपने विभागीय सचिवों और प्रभार वाले जिलों के कलेक्टरों के साथ नियमित समीक्षा कर जनहित की योजनाओं और विकास कार्यों को तेजी से पूरा कराएं। संगठन स्तर पर मंत्रियों के प्रदर्शन की लगातार निगरानी किए जाने की बात भी सामने आई है।
सूरजपुर घटना के बाद बढ़ी सख्ती
सूत्रों का दावा है कि हाल के घटनाक्रमों, विशेषकर सूरजपुर से जुड़े मामले के बाद संगठन स्तर पर नाराजगी बढ़ी है। इसी के चलते मंत्रियों की बैठक तत्काल बुलाई गई। बताया जा रहा है कि संगठन ने पहले प्रदेश स्तर के जिम्मेदार पदाधिकारियों से चर्चा की और उसके बाद प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से बैठक मुख्यमंत्री निवास में आयोजित की गई।
सीएम हाउस में इसलिए हुई बैठक
आमतौर पर संगठन और सरकार के बीच समन्वय से जुड़ी बैठकें पार्टी कार्यालय में आयोजित होती हैं, लेकिन इस बार बैठक मुख्यमंत्री निवास में रखी गई। राजनीतिक गलियारों में इसे प्रशासनिक सख्ती का संकेत माना जा रहा है। बैठक में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भी मौजूदगी बताई जा रही है।
दो महीने बाद फिर होगी समीक्षा
सूत्रों के अनुसार सभी मंत्रियों को अपने विभागों में सुधार और परिणाम दिखाने के लिए दो माह का समय दिया गया है। इसके बाद उनके कार्यों की दोबारा समीक्षा की जाएगी। प्रदर्शन के आधार पर आगे की रणनीति तय किए जाने की बात कही जा रही है।
सार्वजनिक तौर पर नहीं दी गई जानकारी
बैठक के बाद मंत्रियों ने मीडिया से बातचीत में केवल इतना कहा कि यह सत्ता और संगठन के बीच समन्वय को लेकर आयोजित नियमित बैठक थी। हालांकि बैठक के वास्तविक एजेंडे और चर्चा के बिंदुओं को लेकर किसी भी मंत्री ने खुलकर टिप्पणी नहीं की।










