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मानसून सत्र: रायपुर में 24×7 पानी सप्लाई योजना पर विधानसभा में घिरे डिप्टी सीएम, विधायक अजय चंद्राकर ने उठाए सवाल

रायपुर।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में रायपुर शहर की पेयजल व्यवस्था का मुद्दा गरमाया रहा। प्रश्नकाल के दौरान राजधानी में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत ’24×7 जलापूर्ति योजना’ (24 घंटे पानी सप्लाई) की कछुआ चाल पर कुरूद विधायक अजय चंद्राकर ने सरकार को घेरा। उन्होंने योजना की कछुआ गति और विभिन्न मदों के तहत खर्च की गई राशि को लेकर तीखे सवाल दागे, जिसका जवाब नगरीय प्रशासन विकास विभाग के मंत्री व उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दिया।

विधायक अजय चंद्राकर ने पूछा— टेंडर के बाद भी क्यों नहीं मिला पानी?

वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने प्रश्नकाल के दौरान स्मार्ट सिटी, नगरोत्थान योजना और 15वें वित्त आयोग के तहत रायपुर की जलापूर्ति योजनाओं की वर्तमान स्थिति और जारी की गई राशि का ब्यौरा मांगा।

  • एक भी वार्ड में सप्लाई शुरू नहीं: उन्होंने आरोप लगाया कि इस महत्वकांक्षी योजना के टेंडर स्वीकृत होने के बावजूद आज तक रायपुर शहर के किसी भी वार्ड में 24 घंटे जलापूर्ति (24×7) शुरू नहीं हो सकी है।
  • विभागों में तालमेल की कमी: चंद्राकर ने यह भी कहा कि इस योजना को लेकर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) से भी जलापूर्ति की बात कही गई थी, जबकि उनकी जानकारी के अनुसार रायपुर शहर के लिए पीएचई विभाग की ऐसी कोई योजना अस्तित्व में ही नहीं है।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दी सफाई— 14 वार्डों में चल रहा है काम

अजय चंद्राकर के सवालों का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने सदन में सरकार का पक्ष रखा।

डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा:

“रायपुर शहर के 14 वार्डों को चिन्हित कर 24×7 जलापूर्ति योजना का खाका तैयार किया गया था और इस पर अभी काम प्रगति पर है। विभिन्न योजनाओं और मदों के तहत जो राशि स्वीकृत और जारी की गई है, उसी के अनुरूप काम को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।”

जल आवर्धन योजना का दिया हवाला

सदन में चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने पुरानी व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रायपुर में पहले ‘जल आवर्धन योजना’ संचालित की जा रही थी और उस समय के नियमों के अनुसार शहर के भीतर जलापूर्ति से जुड़े कार्यों का जिम्मा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) ही संभालता था।

विधानसभा में इस मुद्दे पर हुई चर्चा के बाद यह साफ है कि राजधानी की इस बड़ी पेयजल योजना को लेकर विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायक भी पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं और आने वाले दिनों में इस पर काम की रफ्तार बढ़ाने का दबाव रहेगा।

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