रायपुर।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे ग्राम डुमरतालाब में रेलवे और सरकारी स्वामित्व वाली बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जे, बंटांकन (टुकड़े करने) और धड़ल्ले से खरीद-बिक्री का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। सरकारी दस्तावेजों में जो जमीन ‘रेलवे सड़क मार्ग’ के रूप में दर्ज है, उसे भू-माफियाओं और राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत से निजी संपत्ति में बदलकर बेच दिया गया। शिकायतकर्ता ने इस पूरे घोटाले के दस्तावेजों के साथ रायपुर कलेक्टर से मुलाकात कर उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।
1955 के दस्तावेजों में रेलवे की सड़क, 2000 में हुआ ‘खेल’
शिकायतकर्ता बलबीर सिंह द्वारा कलेक्टर रायपुर को सौंपे गए पत्र के अनुसार, ग्राम डुमरतालाब की इस सरकारी भूमि के रिकॉर्ड में भारी अनियमितता की गई है।
- सरकारी रिकॉर्ड: खसरा क्रमांक 43/2 की यह भूमि वर्ष 1955 के बाद से ही सरकारी अभिलेखों में और वर्ष 1977 से स्पष्ट रूप से ‘रेलवे सड़क’ के रूप में दर्ज रही है, जो पहले मूल खसरा क्रमांक 30/4 का हिस्सा थी। वर्तमान में भी बी-1 (B-1) फॉर्म के कैफियत कॉलम में इसे रेलवे सड़क की भूमि ही दर्शाया गया है।
- अवैध बंटांकन: आश्चर्यजनक रूप से वर्ष 2000-2001 के दौरान राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर खसरा क्रमांक 43/1 से इसका दोबारा बंटांकन किया गया और विवादित भूमि को 43/2 के रूप में अलग दर्शा दिया गया। इसी फर्जी आधार पर जमीन की रजिस्ट्री भी कर दी गई और नामांतरण (म्यूटेशन) भी पास कर दिया गया।
सवाल: शिकायतकर्ता ने बड़ा सवाल उठाया है कि जब यह जमीन पूरी तरह से रेलवे और सार्वजनिक उपयोग के मार्ग की थी, तो किस वैधानिक अधिकार, आदेश या किसकी अनुमति से इसे निजी स्वामित्व में ट्रांसफर किया गया? यह जांच का सबसे बड़ा विषय है।
वंदना एसोसिएट्स समेत इन लोगों पर है गंभीर आरोप
शिकायत में सीधे तौर पर ‘वंदना एसोसिएट्स’ नामक संस्था को कटघरे में खड़ा किया गया है। आरोप है कि इस फर्म द्वारा रेलवे की सड़क वाली भूमि पर न केवल अवैध कब्जा किया गया है, बल्कि वहां धड़ल्ले से उत्खनन (खुदाई) और प्लॉटिंग कर उसे बेचा जा रहा है। इस कथित अवैध खेल में कुछ प्रमुख नाम भी संज्ञान में आए हैं, जिनमें:
- श्रीमती रामकुमारभाई खेतूमल
- गणेशभाई
- समीरमल
- रामलाल कस्तुचंद
- महावीर आदि शामिल हैं।
इन सभी पर सार्वजनिक संपत्ति से छेड़छाड़ करने और रेलवे मार्ग की भूमि को अवैध रूप से बेचने का आरोप है।
जांच के लिए कलेक्टर के सामने रखे गए ये 5 मुख्य बिंदु:
सार्वजनिक मार्ग और सरकारी संपत्ति से जुड़े इस संवेदनशील मामले में शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से निम्नलिखित बिंदुओं पर तुरंत एक्शन लेने का आग्रह किया है:
- रिकॉर्ड की स्क्रूटनी: खसरा क्रमांक 43/2 और 30/4 के वर्ष 1955 से लेकर आज तक के सभी राजस्व अभिलेखों, नक्शा, बी-1, खसरा पंचशाला और नामांतरण रिकॉर्ड की उच्च स्तरीय जांच हो।
- अधिकारियों पर कार्रवाई: वर्ष 2000-2001 में किस तहसीलदार या राजस्व अधिकारी ने किस कानून के तहत रेलवे की जमीन का नया खसरा (43/2) काटा, उसकी पहचान कर जवाबदेही तय की जाए।
- रजिस्ट्री की जांच: किस आधार पर सरकारी जमीन की रजिस्ट्रियां और नामांतरण प्रमाणित किए गए, इसकी जांच कर दोषी अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज हो।
- काम पर तत्काल रोक: वंदना एसोसिएट्स और संबंधित खरीदार-विक्रेताओं द्वारा की जा रही खुदाई और निर्माण कार्य को तुरंत रुकवाकर वहां यथास्थिति (Status Quo) कायम की जाए।
- मूल स्वरूप में वापसी: यदि जांच में भूमि रेलवे की साबित होती है (जिसके पुख्ता दस्तावेज मौजूद हैं), तो अब तक हुए सभी अवैध नामांतरण और रजिस्ट्री को निरस्त कर जमीन को दोबारा शासकीय रिकॉर्ड में सुरक्षित किया जाए।
यह मामला सीधे तौर पर करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति की अफरा-तफरी और जालसाजी से जुड़ा हुआ है। जनहित और शासकीय संपत्ति की सुरक्षा को देखते हुए अब रायपुर जिला प्रशासन के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।










