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14 घंटे की मैराथन बहस के बाद अविश्वास प्रस्ताव ध्वस्त: मुख्यमंत्री साय का कांग्रेस पर तीखा तंज— ‘झूठ बोलने में पीएचडी होती, तो विपक्ष के लोग महाविद्वान होते’

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा राज्य की विष्णु देव साय सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भारी हंगामे, तीखी नोकझोंक और करीब 14 घंटे से अधिक समय तक चली मैराथन बहस के बाद आखिरकार ध्वस्त हो गया। सत्तापक्ष के संख्याबल और आक्रामक जवाबों के आगे विपक्ष का यह प्रस्ताव टिक नहीं सका।

विपक्ष के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि उनकी सरकार के ढाई साल का कार्यकाल (वर्ष 2026 में) पूरा हो चुका है और विपक्ष द्वारा लाया गया यह अविश्वास प्रस्ताव केवल एक औपचारिकता और राजनीतिक ढोंग मात्र था।

मुख्यमंत्री साय का पलटवार: “क्या जनता के आशीर्वाद के खिलाफ है यह प्रस्ताव?”
बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “विधानसभा और लोकसभा चुनावों में राज्य की जनता ने हमें प्रचंड आशीर्वाद दिया। इसके बाद नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में भी हमारी जीत हुई। मैं विपक्ष से पूछना चाहता हूँ कि क्या यह अविश्वास प्रस्ताव उस जनता के खिलाफ है जिसने हमें चुना? क्या यह उन किसानों के प्रति अविश्वास है जिन्हें हम ₹3,100 धान का मूल्य दे रहे हैं, या उन 70 लाख माताओं-बहनों के खिलाफ है जिन्हें हर महीने महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है?”

मुख्यमंत्री ने आदिवासियों का मुद्दा उठाते हुए कहा, “कांग्रेस ने 70 सालों तक आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक समझा। आज देश की राष्ट्रपति एक आदिवासी महिला (द्रौपदी मुर्मू) हैं और राज्य का मुख्यमंत्री एक गांव के आदिवासी का बेटा है, जो कांग्रेस से पचाया नहीं जा रहा है। हमारी नीति और नीयत दोनों साफ हैं, इसलिए ‘मोदी की गारंटी’ का मतलब हर गारंटी पूरी होने की गारंटी है।” मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि उनके समय राज्य में ‘राजा और महाराजा’ की लड़ाई चलती रही, जिसमें जनता पिसती रही। उन्होंने पुराना नारा याद दिलाते हुए कहा— “ऐसा कोई सगा नहीं, जिसे भूपेश सरकार ने ठगा नहीं।”

नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत का आरोप: “राज्य में जंगलराज, बलौदाबाजार की जांच अब तक अधूरी”
इससे पहले, चर्चा की शुरुआत करते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का एक लंबा आरोप पत्र पेश किया। डॉ. महंत ने कहा कि यह सिर्फ कांग्रेस का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आम जनता का आरोप पत्र है।

विपक्ष के मुख्य आरोप:

बलौदाबाजार हिंसा: गुरु बाबा घासीदास की तपोभूमि में जैतस्तंभ काटे जाने की घटना पर कलेक्टर-एसपी ने समय रहते कदम नहीं उठाया, जिससे इतिहास की यह सबसे शर्मनाक घटना घटी। इतने दिन बीत जाने के बाद भी इसकी निष्पक्ष जांच नहीं हो पाई है।

बिगड़ती कानून व्यवस्था: कोरिया जिले में 29 वर्षीय महिला से दुष्कर्म के बाद जिंदा जलाने और थाने में फरियादी की पीट-पीटकर हत्या किए जाने का मामला उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में रक्षाबंधन के दिन एक बहन की अस्मत लूटकर हत्या कर दी गई। डॉ. महंत ने पूछा, “यदि यह जंगलराज नहीं है, तो क्या है?”

अहंकार का आरोप: विपक्ष ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार और अधिकारी आलोचना बर्दाश्त नहीं कर सकते। अहंकार में डूबी सरकार ने पिछली सरकार के समय के पंचायत और मनरेगा के कार्यों को रोक दिया है।

पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने घेरा: “हसदेव कटाई से तय हुआ सरकार कौन चला रहा है”
अविश्वास प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार के गठन के समय से ही उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। बघेल ने कहा, “यह सरकार 13 दिसंबर को बनी, लेकिन उससे दो दिन पहले ही 11 दिसंबर को हसदेव अरण्य के पेड़ों को काटने का आदेश जारी कर दिया गया। इसी से छत्तीसगढ़ की जनता समझ गई कि परदे के पीछे से इस सरकार को कौन चला रहा है।”

बघेल ने किसानों के मुद्दों को उठाते हुए कहा कि आज ‘डबल इंजन’ की सरकार होने के बावजूद सोसायटियों में धान का उठाव नहीं हो रहा है, राइस मिलर परेशान हैं और सोसायटियों के छोटे कर्मचारियों को जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने खाद और डीजल की किल्लत का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है। साथ ही राशन कार्डों में अनिवार्य ई-केवाईसी (e-KYC) के कारण करीब 30 लाख गरीबों का राशन बंद होने की कगार पर है क्योंकि तकनीकी दिक्कतों के कारण उनका अंगूठा मैच नहीं हो रहा है।

अजय चंद्राकर का तीखा तंज: “विपक्ष का काम सिर्फ औपचारिकता निभाना रह गया”
सत्तापक्ष की ओर से वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने मोर्चा संभालते हुए कांग्रेस पर बेहद तीखे तीर छोड़े। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में विपक्ष एक ‘वाचडॉग’ (प्रहरी) की भूमिका में होता है, लेकिन छत्तीसगढ़ का विपक्ष ऐसा है जो सिर्फ औपचारिकता पूरी करने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाता है।”

चंद्राकर ने पूर्ववर्ती सरकार की तुलना नादिरशाह के शासन से की और नेता प्रतिपक्ष से सवाल किया कि उनकी निष्ठा इस छत्तीसगढ़ राज्य के प्रति है या दिल्ली के किसी एक विशेष परिवार के प्रति? उन्होंने कांग्रेस के इतिहास पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चाटुकारिता करने वाले लोग जनता के प्रति कभी जवाबदेह नहीं हो सकते।

निष्कर्ष: देर रात गिरा प्रस्ताव
पक्ष और विपक्ष के बीच 14 घंटे से अधिक समय तक चली इस मैराथन बहस में आवास योजना, नक्सलवाद, कानून-व्यवस्था, और किसान बोनस को लेकर सदन का तापमान बेहद गर्म रहा। अंततः, ध्वनि मत और संख्या बल के आधार पर विपक्ष का यह अविश्वास प्रस्ताव पूरी तरह से खारिज (ध्वस्त) हो गया और साय सरकार ने सदन में अपनी मजबूती साबित की।

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