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बिलासपुर में ₹17.24 करोड़ का सर्पदंश मुआवजा घोटाला: महिला डॉक्टर के बाद SDM और तहसील कार्यालय के 3 क्लर्क गिरफ्तार, जानिए कैसे काम करता था यह ‘गैंग’

बिलासपुर:

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में 17 करोड़ 24 लाख रुपये के बहुचर्चित ‘सर्पदंश मुआवजा घोटाले’ में पुलिस और प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार करने के मामले में सिम्स की पूर्व महिला डॉक्टर की गिरफ्तारी के बाद, अब पुलिस ने राजस्व विभाग पर शिकंजा कसते हुए एसडीएम (SDM) दफ्तर के दो बाबुओं और तहसील कार्यालय के एक क्लर्क को गिरफ्तार किया है।

1. राजस्व विभाग के कर्मचारियों की गिरफ्तारी

सरकंडा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रविवार को एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार और तहसील कार्यालय के क्लर्क हरिशंकर राठौर को गिरफ्तार कर लिया।

  • क्या थी भूमिका: जांच में पाया गया कि इन कर्मचारियों ने फर्जी प्रकरणों को अपनी लॉगिन आईडी (Login ID) से दर्ज कर दस्तावेज तैयार किए और मुआवजा राशि स्वीकृत कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
  • महिला डॉक्टर पहले ही जेल में: इससे पूर्व तोरवा पुलिस ने सिम्स (CIMS) की तत्कालीन डॉ. प्रियंका सोनी को फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

2. कैसे काम करता था यह पूरा ‘संगठित गिरोह’?

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह घोटाला एक सोचे-समझे गैंग द्वारा संचालित किया जा रहा था:

  • परिजनों से संपर्क: किसी व्यक्ति की (सामान्य या अन्य कारणों से) मृत्यु होने पर गिरोह के सदस्य परिजनों से मिलते थे और उन्हें यह कहने को राजी करते थे कि मौत सांप के काटने से हुई है।
  • फर्जी बैंक खाते व दस्तावेज: गिरोह में शामिल बैंककर्मी फर्जी अकाउंट खोलते थे और वकील कागजात तैयार करते थे।
  • मुआवजे का बंटवारा: शासन से मुआवजा राशि पास होने के बाद पैसा फर्जी खातों में आता था। क्लेम करने वाले परिवार को केवल ₹50,000 दिए जाते थे और बाकी लाखों रुपये गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे।
  • मास्टरमाइंड: अब तक ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा और वकील रंजीत चतुर्वेदी समेत कई लोग पकड़े गए हैं। गोविंद इस नेटवर्क का मुख्य संचालक बताया जा रहा है, जबकि मुख्य आरोपी वकील श्रवण वस्त्रकार और डॉ. गोले फिलहाल फरार हैं।

3. पुलिस प्रशासन का कड़ा रुख

एसएसपी (SSP) रजनेश सिंह स्वयं इस जांच की निगरानी कर रहे हैं।

एसएसपी रजनेश सिंह का बयान: “हमारे पास कलेक्टोरेट से 17 मामले जांच के लिए आए थे, जिन पर जिले के अलग-अलग थानों में मामले दर्ज किए गए हैं। केवल रतनपुर का एक मामला सही पाया गया है, बाकी सब फर्जी हैं। साल 2019 से 2023 के बीच संदिग्ध रिपोर्ट देने वाले कई डॉक्टरों से पूछताछ की जा रही है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां होंगी।”

4. विधानसभा में उठा था मुद्दा

यह मामला बेलतरा से विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में उठाया था, जिसके बाद पूरे मामले का भंडाफोड़ हुआ। विधायक शुक्ला ने कहा कि यह मामला केवल 17 केस तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भी बड़ा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से इसकी और गहनता से जांच करने की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि इस घोटाले का पहला मामला बिल्हा से सामने आया था, जहां जहर खाने से हुई मौत को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ‘सर्पदंश’ दिखाया गया था।

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