मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने सीएसएएम (चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल) और डीपफेक कंटेंट को लेकर माफी मांगी है. उन्होंने प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों पर भी खेद जताया. साथ ही यह भी कहा गया कि कुछ तरह के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बड़ी रकम खर्च की गई थी. इस दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि कंपनी को इंटरमीडियरी की परिभाषा के तहत संरक्षण नहीं मिलेगा और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत सेफ हार्बर का लाभ लागू नहीं होगा.बता दें कि मार्क जुकरबर्ग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाए जाने के मामले में तीन दिन के भीतर माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया गया था.
मार्क जुकरबर्ग ने मांगी माफी
मार्क जुकरबर्ग ने सीएसएएम कंटेंट, डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों को लेकर माफी मांगी है. उन्हें स्पष्ट किया गया कि मेटा को इंटरमीडियरी की परिभाषा के तहत नहीं माना जा सकता, क्योंकि कंपनी यह तय करती है कि कौन सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचेगा. इसलिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा इस मामले में लागू नहीं होगी. यह भी कहा गया कि कुछ तरह के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बड़ी रकम खर्च की गई थी. इस पर भी माफी मांगी गई और गलती पर खेद जताया गया.
पीएम मोदी का वीडियो हटने पर मचा था विवाद
संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 23 जुलाई के वीडियो को अस्थाई रूप से हटाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई थी. समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इसे 140 करोड़ भारतीयों के प्रतिनिधि के वीडियो को हटाने का मामला बताते हुए “लोकतंत्र पर हमला” कहा था. समिति ने मेटा से इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और मार्क जुकरबर्ग को माफी मांगने के लिए तीन दिन का समय दिया था. अब मार्क जुकरबर्ग ने माफी मांगी है.
तीन दिन का अल्टीमेटम, सेफ हार्बर हटाने की चेतावनी
समिति ने कहा कि यदि मेटा तीन दिन के भीतर कार्रवाई नहीं करता और मार्क जुकरबर्ग माफी नहीं मांगते, तो कंपनी से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिलने वाली “सेफ हार्बर” सुरक्षा हटाने की सिफारिश की जा सकती है. निशिकांत दुबे का कहना था कि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाना किसी इंटरमीडियरी का काम नहीं बल्कि पब्लिशर जैसा फैसला है. उनके अनुसार अगर सेफ हार्बर सुरक्षा हटती है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अधिकारियों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज करने का रास्ता खुल सकता है.








