रायपुर। खाद्य तेल खरीदने वाले ग्राहकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। करीब एक साल से कम वजन वाले पाउच के जरिए कीमतों में हो रहे खेल पर अब केंद्र सरकार ने रोक लगा दी है। कंपनियों को फिर से मानक 1 लीटर पैकिंग की व्यवस्था में लौटने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, पहले खाद्य तेल कंपनियां 1 लीटर के पाउच बेचती थीं। लेकिन बाद में कम वजन की पैकिंग की अनुमति मिलने के बाद बाजार में 650, 750, 800 एमएल और अन्य कम वजन वाले पाउच आने लगे। इससे ग्राहक कई बार पैकेट देखकर भ्रमित हो जाते थे और कम मात्रा के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती थी।
800 ML का पैक 1 लीटर से भी महंगा पड़ रहा था
कम वजन वाली पैकिंग में कीमतों का अंतर किस तरह बढ़ रहा था, इसे एक उदाहरण से समझिए। हरेली तेल का 800 एमएल यानी करीब 730 ग्राम का पैक 130 रुपये में बिक रहा था। इस हिसाब से एक लीटर तेल की कीमत करीब 162.50 रुपये बैठती थी।
वहीं, इसी दौरान कीर्ति गोल्ड सोया तेल का 1 लीटर पैक करीब 150 से 155 रुपये में उपलब्ध बताया गया। यानी कम वजन वाला पैक सस्ता दिखने के बावजूद प्रति लीटर ज्यादा महंगा पड़ रहा था।
31 अगस्त तक पुराना स्टॉक बेचने की छूट
केंद्र सरकार के नए निर्देश के बाद कंपनियों ने कम वजन वाले पाउच की नई सप्लाई बंद करना शुरू कर दिया है। हालांकि, कंपनियों और कारोबारियों को पुराने स्टॉक को बाजार से निकालने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया है।
इसके बाद यानी 1 सितंबर से कम वजन वाले खाद्य तेल के पाउच की बिक्री नहीं की जा सकेगी।
क्यों दी गई थी कम वजन की छूट?
कम वजन वाली पैकिंग की अनुमति मूल रूप से उन परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से दी गई थी, जो एक साथ 1 लीटर तेल खरीदने में सक्षम नहीं होते। इससे वे अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से 650 या 750 एमएल जैसे छोटे पैक खरीद सकते थे।
लेकिन आरोप है कि इसी छूट का इस्तेमाल कुछ कंपनियों और कारोबारियों ने कीमतों के खेल के लिए किया। कम मात्रा के पैकेट को इस तरह कीमत पर बेचा गया कि ग्राहक को प्रति लीटर ज्यादा भुगतान करना पड़ा।
अब ग्राहक कैसे होंगे फायदे में?
अब कंपनियों को दोबारा 1 लीटर की मानक पैकिंग पर लौटना होगा। इससे ग्राहकों के लिए अलग-अलग ब्रांड की कीमतों की तुलना करना आसान होगा और कम वजन के नाम पर होने वाला भ्रम भी कम होगा।
डूमरतराई थोक बाजार के अध्यक्ष प्रेम पाहूजा के मुताबिक, कंपनियों ने कम वजन वाले पाउच की सप्लाई बंद कर दी है और 31 अगस्त के बाद ऐसे पैकेट बाजार में नहीं बिकेंगे।
यानी अब 1 लीटर के नाम पर 800 एमएल या 750 एमएल का खेल नहीं चलेगा। ग्राहक को पैकेट पर लिखी मात्रा और कीमत देखकर खरीदारी करने में भी आसानी होगी।









