भिलाई। भिलाई नगर से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका अब प्रारंभिक कानूनी आपत्तियों से आगे बढ़कर ट्रायल के चरण में पहुंच गई है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और भाजपा नेता प्रेम प्रकाश पांडेय की ओर से दायर इस चुनाव याचिका में देवेंद्र यादव के नामांकन में कथित तौर पर संपत्ति, आपराधिक मामलों और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के संबंध में गलत या अपूर्ण जानकारी देने के आरोप लगाए गए हैं। I
हाईकोर्ट में पहले ही खारिज हो चुकी है प्रारंभिक आपत्ति
प्रेम प्रकाश पांडेय ने 2024 में देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती देते हुए चुनाव याचिका दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि नामांकन के दौरान Form-26 में कई महत्वपूर्ण जानकारियों का सही तरीके से खुलासा नहीं किया गया।
देवेंद्र यादव की ओर से चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज कराने के लिए Order VII Rule 11 के तहत आवेदन दिया गया था, लेकिन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जुलाई 2024 में इसे खारिज कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि याचिका में उठाए गए मुद्दों को सिर्फ प्रारंभिक स्तर पर खत्म नहीं किया जा सकता। I
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
इसके बाद देवेंद्र यादव की ओर से सुप्रीम कोर्ट में SLP (C) No. 6306/2025 दायर की गई। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में यह मामला दर्ज है और फरवरी 2025 में आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक भी लगाई गई थी।
बाद में मामला आगे बढ़ा और हाईकोर्ट ने चुनाव याचिका में तय मुद्दों को प्रारंभिक तौर पर निपटाने की कोशिश को भी स्वीकार नहीं किया।
हाईकोर्ट ने कहा—मामला सबूतों से तय होगा
30 जून 2026 के आदेश में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने Order XIV Rule 2 के तहत देवेंद्र यादव की ओर से दायर आवेदन खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिका में उठाए गए कई मुद्दे तथ्य और कानून दोनों से जुड़े हैं, इसलिए उन्हें गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच के बाद ही तय किया जा सकता है। I
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह तय करने के लिए कि नामांकन में कथित तौर पर दी गई जानकारी चुनाव कानून का उल्लंघन है या नहीं, पक्षकारों को साक्ष्य पेश करने होंगे।
याचिका में क्या हैं आरोप?
चुनाव याचिका में आरोप लगाया गया है कि देवेंद्र यादव के नामांकन के दौरान संपत्ति, आय, लंबित आपराधिक मामलों और अन्य जानकारियों से जुड़े विवरणों में कथित विसंगतियां थीं।
याचिका में यह भी आरोप है कि कुछ आपराधिक मामलों की स्थिति और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी सही तरीके से घोषित नहीं की गई। हालांकि, ये सभी आरोप हैं और अभी अदालत में इनका अंतिम रूप से सत्यापन होना बाकी है। I
अब ट्रायल में क्या होगा?
हाईकोर्ट ने पहले ही चुनाव याचिका में मुद्दे तय कर दिए हैं। अब मामले में गवाहों के बयान, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य सामने रखे जाएंगे। इसके आधार पर अदालत यह तय करेगी कि याचिकाकर्ता के आरोप कानून और साक्ष्यों की कसौटी पर साबित होते हैं या नहीं। I
अगर आरोप साबित होते हैं और अदालत चुनाव याचिका को स्वीकार करती है, तो इसका असर देवेंद्र यादव के निर्वाचन की वैधता पर पड़ सकता है। वहीं, यदि आरोप साबित नहीं होते हैं, तो उनका निर्वाचन बरकरार रहेगा।
अभी फैसला नहीं आया है
महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी देवेंद्र यादव की विधायकी रद्द नहीं हुई है और चुनाव याचिका पर अंतिम फैसला भी नहीं आया है। फिलहाल अदालत ने केवल यह तय किया है कि मामले को प्रारंभिक आपत्तियों के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता और विवादित मुद्दों की जांच ट्रायल के जरिए होगी। I
अब सबकी नजर इस बात पर है कि ट्रायल में कौन से साक्ष्य सामने आते हैं और भिलाई नगर विधानसभा चुनाव के परिणाम को चुनौती देने वाली इस याचिका पर हाईकोर्ट का अंतिम फैसला क्या होता है।









