Trendingछत्तीसगढबड़ी खबर

रायपुर समेत 11 एयरपोर्ट PPP मॉडल पर निजी कंपनियों को देने की तैयारी, 50 साल की लीज का प्रस्ताव

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट अब सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल के तहत निजी ऑपरेटर को सौंपे जाने की प्रस्तावित योजना में शामिल है। केंद्र सरकार ने देश के 11 एयरपोर्ट्स को पांच समूहों में बांटकर उनके संचालन, प्रबंधन और विकास के लिए निजी भागीदार नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव को 4 अगस्त 2026 को PPPAC से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है।

50 साल की होगी प्रस्तावित लीज

नागर विमानन मंत्रालय के प्रस्ताव के मुताबिक, इन एयरपोर्ट्स को 50 साल की कंसेशन अवधि के लिए PPP मॉडल पर दिया जाएगा। हर समूह में एक बड़े यानी एंकर एयरपोर्ट को एक या अधिक छोटे एयरपोर्ट के साथ जोड़ा गया है। इसके पीछे मकसद छोटे एयरपोर्ट्स की व्यावसायिक क्षमता बढ़ाना और निजी निवेश को आकर्षित करना है।

रिपोर्टों के मुताबिक, इन 11 एयरपोर्ट्स के विकास के लिए निजी कंपनियों की ओर से करीब 8,622 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। हालांकि, यह अभी प्रस्तावित प्रक्रिया है और अंतिम निजी ऑपरेटर का चयन बोली प्रक्रिया के जरिए होना बाकी है।

रायपुर और औरंगाबाद एक समूह मे प्रस्तावित पांच समूहों में रायपुर एयरपोर्ट को औरंगाबाद एयरपोर्ट के साथ रखा गया है। पांचों समूह इस प्रकार हैं:

अमृतसर + कांगड़ा-गग्गल
वाराणसी + गया + कुशीनगर
भुवनेश्वर + हुबली
रायपुर + औरंगाबाद
तिरुचिरापल्ली + तिरुपति

हर समूह के एयरपोर्ट्स का संचालन एक ही निजी कंसेशनियर को देने का प्रस्ताव है।

रायपुर एयरपोर्ट क्यों अहम है?

रायपुर छत्तीसगढ़ का प्रमुख हवाई संपर्क केंद्र है। AERA के एक आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक, रायपुर एयरपोर्ट को पहले ही PPP के लिए शॉर्टलिस्ट किया जा चुका था और वित्त वर्ष 2024-25 में यहां करीब 2.57 करोड़ नहीं, बल्कि 2.57 मिलियन यानी 25.7 लाख यात्रियों का यात्री ट्रैफिक दर्ज हुआ।

रायपुर को औरंगाबाद के साथ जोड़ने से सरकार को उम्मीद है कि बड़े एयरपोर्ट से मिलने वाली व्यावसायिक क्षमता छोटे एयरपोर्ट के विकास में मदद करेगी।

यात्रियों को क्या फायदा हो सकता है?

PPP मॉडल के पीछे सरकार का प्रमुख उद्देश्य एयरपोर्ट के इंफ्रास्ट्रक्चर, संचालन क्षमता और यात्री सुविधाओं में निजी निवेश बढ़ाना है। निजी ऑपरेटर एयरपोर्ट के संचालन, प्रबंधन और विकास की जिम्मेदारी संभालेंगे।

हालांकि, यात्रियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह भी रहेगा कि निजी संचालन के बाद यूजर चार्ज, पार्किंग, खान-पान और अन्य सेवाओं की लागत पर क्या असर पड़ेगा। इनसे जुड़े नियम और शुल्क कंसेशन एग्रीमेंट और नियामकीय व्यवस्था के तहत तय होंगे।

कर्मचारियों की नौकरी को लेकर भी व्यवस्था

प्रस्ताव में AAI के मौजूदा कर्मचारियों को लेकर भी सुरक्षा व्यवस्था रखी गई है। निजी ऑपरेटर को शुरुआत में एक साल की संयुक्त प्रबंधन अवधि रखनी होगी। इसके बाद प्रस्ताव के मुताबिक, निजी ऑपरेटर को कम से कम तीन साल तक AAI के 60 प्रतिशत कर्मचारियों को बनाए रखना होगा।

इसका उद्देश्य निजी संचालन शुरू होने के तुरंत बाद कर्मचारियों की भूमिका में बड़े बदलाव से बचना है।

एक कंपनी को कितने एयरपोर्ट मिलेंगे?

सरकार ने एयरपोर्ट सेक्टर में अत्यधिक केंद्रीकरण यानी कुछ ही कंपनियों के हाथ में बहुत ज्यादा एयरपोर्ट जाने के जोखिम को भी ध्यान में रखा है। इसलिए एक ही बोलीदाता कितने समूह हासिल कर सकता है, इस पर सीमा तय करने का प्रस्ताव है।

अभी क्या स्थिति है?

महत्वपूर्ण बात यह है कि रायपुर एयरपोर्ट का निजीकरण अभी पूरा नहीं हुआ है। फिलहाल 11 एयरपोर्ट्स को PPP मॉडल पर देने के प्रस्ताव को PPPAC की in-principle approval मिली है। आगे बोली प्रक्रिया, कंसेशन शर्तें और अंतिम चयन जैसी प्रक्रियाएं पूरी होंगी।

यानी आने वाले समय में रायपुर एयरपोर्ट के संचालन और विकास में निजी क्षेत्र की बड़ी भूमिका देखने को मिल सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कौन सी कंपनी बोली जीतती है और रायपुर एयरपोर्ट में यात्री सुविधाओं व इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर क्या बदलाव किए जाते हैं।

Related Posts

बिलासपुर: सिंगल यूज प्लास्टिक पर हाईकोर्ट की सख्त निगरानी, प्रदेशभर में जारी रहेगा अभियान

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलिथीन के इस्तेमाल को…

छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्ती नियमों में बड़ा बदलाव, 100 से ज्यादा नए पद शामिल; योग्यता और परीक्षा पैटर्न भी तय

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से होने वाली सरकारी…

1 of 459