हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय ने सिंधु जल विवाद पर अपना फैसला सुनाया है. 5 जजों की बेंच ने सिंधु जल समझौते पर भारत के निलंबन के आदेश को गलत ठहराया है. इसके अलावा मध्यस्थता न्यायालय ने कहा है कि भारत चिनाब नदी पर जो जल विद्युत परियोजना तैयार कर रहा है. उसे तुरंत रोक दे. हालांकि, भारत ने इस कोर्ट को ही अमान्य करार दिया है. भारत ने कहा कि नई दिल्ली इस फैसले को मानने के लिए बाध्य नहीं है.
भारत कोर्ट की सुनवाई में भी शामिल नहीं हुआ. अकेले पाकिस्तान ने पूरे मामले में अपनी दलील रखी. इस पूरे मामले में पाकिस्तान की तरफ से मामले में पैरवी करने के लिए 20 से ज्यादा वकील कोर्ट में पेश हुए.
भारत ने कोर्ट को अमान्य क्यों ठहराया?
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ है. भारत का कहना है कि पाकिस्तान आतंक फैलाता है और इसके लिए नई दिल्ली ने इस संधि को निलंबित कर दिया है. कोर्ट ने भी इस दलील को गंभीर माना. हालांकि, कोर्ट आतंक को लेकर पाकिस्तान को दंडित नहीं कर सकता है. क्योंकि, अंतरराष्ट्रीय कोर्ट के पास फैसले को लागू कराने का कोई अधिकार नहीं है.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा- यह बात मान भी लिया जाए कि पाकिस्तान आतंकियों को शह देता है. इसके बाद भी पानी रोकना सही नहीं है. यही वजह है कि भारत ने शुरू में ही इस कोर्ट का बहिष्कार कर दिया. कोर्ट ने भारत का पक्ष जानने के लिए अखबारों में छपी खबरों का सहारा लिया है.
2 जज अमेरिका तो 2 का पाक से कनेक्शन
फैसला सुनाने वाले 2 जज अमेरिका से हैं. वहीं 2 जजों का पाकिस्तान से सीधा कनेक्शन है. पाकिस्तान ने ही सिंधु जल विवाद को लेकर याचिका दाखिल की है. ऐसे में इस कोर्ट की निष्पक्षता का कोई औचित्य नहीं रह जाता है.
- सीन डी मर्फी- अमेरिका के रहने वाले मर्फी 2011 से ही यूएन से जुड़े हैं. वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई के बाद अमेरिकी विदेश विभाग में कानूनी सलाहकार के तौर पर जुड़ गए. मर्फी मामले को लीड कर रहे हैं.
- डब्यू वुट्रेट- बेल्जियम के रहने वाले हैं. केयू लेयुवेन से Bioscience Engineering में पीएचडी कर चुके हैं. जल मामलों के एक्सपर्ट माने जाते हैं. जल विवाद के कारण इन्हें जजों की टीम में शामिल किया गया.
- जेफरी पी मिनियर- अमेरिका के रहने वाले जेफरी भी 5 जजों की बेंच में शामिल हैं. अमेरिका के सॉलिसिटर जनरल भी रह चुके हैं. 2011 से 2022 तक अमेरिकी विदेश विभाग में बड़ी भूमिका में रहे हैं.
- शौकत अल ख्शवानेह- जॉर्डन के रहने वाले हैं. साल 2000 में इंटरनेशनल कोर्ट में जज बनाए गए. इन्हें पाकिस्तान कोटा से आर्टिबिशन में शामिल किया गया है.
- डोनाल्ड ब्लैकमोरे- ऑस्ट्रेलिया के रहने वाले हैं. साल 2011 में ब्लैकमोर को पाकिस्तान सरकार ने एडवाइजर नियुक्त किया था. इनका काम दुनिया के देशों से बात करते पाकिस्तान को जल लाभ पहुंचाना था. इन्हें पाकिस्तान से सरकारी सैलरी मिलती थी.








