रायपुर: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सेवाकालीन शिक्षकों को टीईटी (TET) अर्हता प्राप्त करने के लिए समय-सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ में भी हलचल तेज हो गई है। हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा द्वारा 25 अगस्त 2026 को 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट देने का सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद, अब छत्तीसगढ़ के शिक्षक भी अपने राज्य में इसी तरह के प्रावधान की पुरजोर मांग कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा की प्रमुख मांगें:
- तमिलनाडु की तर्ज पर स्थायी छूट या विधानसभा में प्रस्ताव: छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा का कहना है कि सेवारत शिक्षक नई नौकरी पाने के लिए नहीं बल्कि अपनी दक्षता बढ़ाने के लिए इस योजना से जुड़े हैं। चूंकि 17 अगस्त 2012 तक छत्तीसगढ़ में टीईटी की अनिवार्यता नहीं थी, इसलिए राज्य सरकार तमिलनाडु की तरह विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर इसे केंद्र सरकार को भेज सकती है।
- परीक्षा के लिए वार्षिक कैलेंडर: शिक्षक संघ का तर्क है कि स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने और उनकी परीक्षाएं लेने के साथ-साथ शिक्षकों को खुद भी अध्ययन करना पड़ रहा है। इसलिए शासन को टीईटी आयोजन के लिए एक स्पष्ट वार्षिक कैलेंडर जारी करना चाहिए ताकि पर्याप्त समय मिल सके।
- व्यावहारिक पाठ्यक्रम और 33% उत्तीर्णांक: मोर्चा के नेताओं (वीरेंद्र दुबे, केदार जैन और संजय शर्मा) ने मांग की है कि परीक्षा का पाठ्यक्रम पूरी तरह व्यावहारिक और सेवा-अनुभव पर आधारित होना चाहिए। इसके अलावा, परीक्षा में न्यूनतम उत्तीर्णांक 33% रखा जाए ताकि वर्षों से सेवाएं दे रहे योग्य और अनुभवी शिक्षक अनावश्यक रूप से अपात्र न हों।
- स्थानीय स्तर पर विभागीय परीक्षा का विकल्प: संजय शर्मा (प्रदेश संयोजक) का सुझाव है कि चूंकि शिक्षक राज्य शासन के कर्मचारी हैं और उनके नियम-निर्देश स्थानीय स्तर पर तय होते हैं, इसलिए स्कूल शिक्षा विभाग एनसीटीई से पत्राचार कर स्वयं विभागीय स्तर पर परीक्षा आयोजित कर सकता है। इससे अनुभवी शिक्षकों की दक्षता भी बढ़ेगी और कानूनी-वैधानिक औपचारिकताएं भी पूरी हो जाएंगी।
इस संबंध में शिक्षक संघ द्वारा पूर्व में ही शिक्षा विभाग को विस्तृत सुझाव सौंपे जा चुके हैं, और अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस पर क्या निर्णय लेती है।









