राजधानी रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच मुकाबला खेला गया… जिसे दक्षिण अफ्रीका ने एक रिकॉर्ड रन चेस कर जीत लिया… लेकिन इसके विपरीत आश्चर्यजनक बात यह रही की मैच के प्राइज डिसटीब्यूशन सेरिमनी में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व नदारत रहा….
राजधानी रायपुर में बने इस स्टेडियम को बनाने में 140 करोड़ रुपए का खर्चा आया था… पहले इसका नियंत्रण राज्य सरकार के पास था…लेकिन कुछ दिन पहले ही इसे बीसीसीआई को 30 साल के लिए लीज पर दे दिया गया….इसे लेकर वरिष्ठ पत्रकार अनिल पुस्तकर ने सरकार पर मिली भगत का आरोप लगाया है उनका कहना है कि 140 करोड रुपए की भारी भरकम लागत से बने स्टेडियम को… मैच डेढ़ करोड़ रुपए के सालाना किराए पर बीसीसीआई को सौपा गया है….. हैरानी की बात है कि राज्य में इतना बड़े मैच के आयोजन के बाद अवार्ड सेरेमनी में…छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद और क्रिकेट जगत के चाणक्य माने जाने वाले राजीव शुक्ला नदारत रहे…. आपने उन्हें देश में होने वाले हर एक मैच की अवार्ड सेरेमनी में शिरकत करते देखा होगा… लेकिन क्या बात रही कि वह रायपुर में हुए इस मैच के अवार्ड सेरेमनी में शामिल नहीं हुए…. इसके बाद आप खुद समझ सकते हैं कि बीसीसीआई के साथ हुए इतने बड़े एग्रीमेंट के बाद भी राज्य ने क्या पाया और क्या खोया….

दूसरी तरफ यह बात भी समझ से परे है… कि कैसे सरकार 3 करोड़ 40 लाख रुपए सालाना मेंटेनेंस बचाने के लिए… 140 करोड़ की लागत से बने स्टेडियम को डेढ़ करोड़ रुपए की सालाना लीज पर दे सकती है….अगर आप जमीन का मूल्य देखें तो स्टेडियम हजार करोड रुपए का है…और उसे उस रकम के ब्याज से भी कम कीमत पर लीज पर देना कौन सी अक्लमंदी है…
हालांकि ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार में कोई कुशल, सलाहकार नहीं है प्रदेश में एक से बढ़कर एक आईएएस आईपीएस और आईआरएस अफसर की फौज है…. मगर इसके बावजूद इतना बड़ा सौदा कैसे हुआ और किसे फायदा पहुंचाने के लिए किया गया यह समझ से परे है….
इन सबके बीच सबसे बड़ी हैरानी यह है कि जो पक्ष और विपक्ष छोटी-छोटी बातों पर कुत्ते बिल्ली के जैसे सड़क से लेकर सदन तक झगड़ता रहता है… वह विपक्ष भी मानो मौन व्रत करके बैठा है… जिसे देखकर कोई भी यह समझ सकता है कि… इस मामले में दोनों एक ही नाव के यात्री हैं…. पक्ष- विपक्ष की यह जुगलबंदी…. इसी बात की संकेत देती है कि राज्य की जनता के हक को किसी और को फायदा पहुंचाने की साजिश हो रही है….
दूसरी तरफ राज्य सरकार ने बिना किसी टेंडर खोले ही बीसीसीआई को इस लीज पर दे दिया… अरे जिस अडानी अंबानी का नाम लेकर दिन-रात शोर-शराबा करते हो कम से कम उनसे पूछ लेते… हो सकता है कि कुछ ज्यादा राजस्व प्रदेश को मिल जाता… फिर यह चिल्लर की कमाई समेटने के लिए गाइड लाइन की दर बढ़ाकर अपनी खुद की फजीहत नहीं करवानी पड़ती।









